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ग़ज़ल
थे ख़ाक-ए-राह भी हम लोग क़हर-ए-तूफ़ाँ भी
सहा तो क्या न सहा और किया तो क्या न किया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
एक गुमाँ का हाल है और फ़क़त गुमाँ में है
किस ने अज़ाब-ए-जाँ सहा कौन अज़ाब-ए-जाँ में है
जौन एलिया
ग़ज़ल
प्यार मोहब्बत लाग लगाओ के बारे में मत सोचो
रहा-सहा जो भरम बचा है यूँ वो भी उठ जाएगा
जाफ़र अब्बास
ग़ज़ल
सहा जाता नहीं हम से ग़म-ए-हिज्र-ए-मुसलसल
ज़रा सी देर को तेरी रिफ़ाक़त चाहिए है
फ़रहत नदीम हुमायूँ
ग़ज़ल
लज़्ज़त ही थी कुछ ऐसी कि छोड़ा न सब्र को
करते रहे वो जौर-ओ-सितम मैं सहा किया