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ग़ज़ल
हवा तनाबें उखेड़ डाले कि साएबाँ को उधेड़ डाले
मैं ख़ौफ़ से बे-नियाज़ हो कर ये आशियाना बना रहा हूँ
मोहम्मद ओवैस मालिक
ग़ज़ल
किसी हादसे की ख़बर हुई तो फ़ज़ा की साँस उखड़ गई
कोई इत्तिफ़ाक़ से बच गया तो ख़याल तेरी तरफ़ गया
ग़ज़ल
अक़ाएद वहम हैं मज़हब ख़याल-ए-ख़ाम है साक़ी
अज़ल से ज़ेहन-ए-इंसाँ बस्ता-ए-औहाम है साक़ी