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ग़ज़ल
मयस्सर हो तो क़द्रे लुत्फ़ भी नेमत है याँ यारो
किसी का वादा-ए-ऐश-ए-दवाम अच्छा नहीं लगता
आल-ए-अहमद सुरूर
ग़ज़ल
मता'-ए-हुस्न-ए-‘ऐश-ए-जावेदाँ मा'लूम होती है
तिरी रौनक़ बहार-ए-बे-ख़िज़ाँ मा'लूम होती है
जलील क़िदवई
ग़ज़ल
नूह नारवी
ग़ज़ल
कोई है महव-ए-ऐश-ओ-तलबगार-ए-ज़िंदगी
कोई है शिकवा-संज-ओ-गिराँ-बार-ए-ज़िंदगी
बशीरून्निसा बेगम बशीर
ग़ज़ल
सर-ए-महफ़िल मआ'ल-ए-'ऐश-ए-महफ़िल याद रखता है
वो इंसाँ है जो आसानी में मुश्किल याद रखता है
बिसमिल शाहजहाँपुरी
ग़ज़ल
नई बज़्म-ए-ऐश-ओ-नशात में ये मरज़ सुना है कि आम है
किसी लोमड़ी को मलेरिया किसी मेंठकी को ज़ुकाम है
शौक़ बहराइची
ग़ज़ल
ख़ूगर-ए-ऐश-ओ-मसर्रत दिल-ए-ख़ुद-काम नहीं
है ये आराम की सूरत मगर आराम नहीं
नवाब सय्यद हकीम अहमद नक़्बी बदायूनी
ग़ज़ल
न शौक़-ए-लज़्ज़त-ए-दुनिया न ज़ौक़-ए-ऐश-ए-दवाम
हमारे दिल पे तिरी चश्म का फ़ुसूँ है बहुत
ज़ियाउल हसन
ग़ज़ल
ऐश मेरठी
ग़ज़ल
लब पे ऐश-ए-अहद-ए-माज़ी का है अफ़साना हनूज़
जा चुकी है फ़स्ल-ए-गुल और मैं हूँ दीवाना हनूज़
मानी जायसी
ग़ज़ल
बज़्म-ए-नशात-ओ-ऐश का सामाँ लिए हुए
आई सबा बहार-ए-गुलिस्ताँ लिए हुए