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ग़ज़ल
ख़ुदा होना बी मुश्किल है बंदा होना बी मुश्किल है
समझता है यू नुक्ते कूँ जो आरिफ़ साहिब-ए-दिल है
क़ुर्बी वेलोरी
ग़ज़ल
सुर्मा से गर्द-ए-मिज़्गाँ सफ़ बाँध के बिठी हैं
शाह-ए-नयन कूँ तेरी यू क़िब्ला-गाह बस है
अब्दुल वहाब यकरू
ग़ज़ल
ख़ुदा जाने तुझे उस की ख़बर है या नहीं ज़ालिम
कि वो इक आन में क्या क्या समयँ मुझ को दिखाता है
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
ग़ज़ल
अगर देखें बहार-ए-हुस्न खिल गुल के नमन फूलें
रहीं हैं मुँद जद्दाई ये ख़िज़ाँ सीं जूँ कली अँखियाँ
अब्दुल वहाब यकरू
ग़ज़ल
हर इक जो उज़्व है सो मिसरा-ए-दिलचस्प है मौज़ूँ
मगर दीवान है ये हुस्न सर-ता-पा जमाली का
आबरू शाह मुबारक
ग़ज़ल
सदा मश्क़-ए-जुनून-ए-इश्क़ में रहता है सौदाई
अगर 'दाऊद' की यू ज़िश्त-ख़ू जावे तो क्या होवे