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नज़्म
अख़्तर शीरानी
नज़्म
हबीब जालिब
नज़्म
ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है
ख़ून फिर ख़ून है टपकेगा तो जम जाएगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
और आबादी में तू ज़ंजीरी-ए-किश्त-ओ-नख़ील
पुख़्ता-तर है गर्दिश-ए-पैहम से जाम-ए-ज़िंदगी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
अगर देखा भी उस ने सारे आलम को तो क्या देखा
नज़र आई न कुछ अपनी हक़ीक़त जाम से जम को
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मोहसिन नक़वी
नज़्म
लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद
सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तुम्हारे साया-ए-रुख़सार-ओ-लब में साग़र-ओ-जाम
सलाम लिखता है शाएर तुम्हारे हुस्न के नाम