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नज़्म
वो साथ साथ थी तो फिर ज़माँ बदलने लग गए
ज़माँ तो फिर ज़माँ भला जहाँ बदलने लग गए
अशफ़ाक़ अहमद साइम
नज़्म
फिर ख़ुद ही दिल बोल उठता है अब वक़्त बदलने वाला है
ज़र्रे सूरज बन जाएँगे वो दौर भी आने वाला है