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नज़्म
बिखेरे उस ने तारे हर तरफ़ मेहर-ओ-मोहब्बत के
रही हर दौर में अम्न-ओ-अमाँ की कहकशाँ उर्दू
रहबर जौनपूरी
नज़्म
जिन्हों ने मेरी राहों में मह-ओ-अंजुम बिखेरे हैं
मैं समझा था मिरी रातों में चमकेंगे तिरे आरिज़