आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "chahal"
नज़्म के संबंधित परिणाम "chahal"
नज़्म
चाहा कि मैं भी निकलूँ उन में से छुट-छुटा कर
दौड़े कई ये कह कर जाता है दम चुरा कर
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
सड़क जो आती है छावनी से चहल-पहल उस पे ख़ूब ही है
निकल के गुंजान बस्तियों से बरा-ए-तफ़रीह सब हैं आए
नुशूर वाहिदी
नज़्म
वो प्रेमचंद-मुंशी-ए-बे-मिस्ल-ओ-बे-बदल
थी जिस के दम से बज़्म-ए-अदब में चहल-पहल
रंगेशवर दयाल सक्सेना सूफ़ी
नज़्म
यूँ न था मैं ने फ़क़त चाहा था यूँ हो जाए
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा