aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chhal-kapat"
लगी लिपटी छल-कपट झूटये लफ़्ज़ उस ने सुने तो थे
छल कपट झूट न धोका न फ़रेबकोई उलझन कोई फ़ित्ना न कोई झुंझलाहट
भूकी आँखें कल को देखींझूटी आस लगाए
धो दे सारा क्रोध कपटशहरों की दिशाओं का सब छल
जनवरी की सर्दी मेंयार शब-नवर्दी में
ज़माना तेज़ धार हैजो चल गया सो पार है
शख़्सियतहाथों में काँपी
चुप-चाप रहोवर्ना ख़ामोशी की चादर
ज़ात का आईना-ख़ानाजिस में रौशन इक चराग़-ए-आरज़ू
अंधेरा डाँट कर बोलासुनो सूरज की ऐ नन्ही किरन
आली आई बसंत बहाररंग रंग के फूल खिले हैं
आसमान के सीने में ग़म चरख़ा कात रहा हैसंग-ए-मील
देखने की तो किसे ताब है लेकिन अब तकजब भी उस राह से गुज़रो तो किसी दुख की कसक
ऐ चाँद मुझे इतना तो बतातू ने भी प्रेम किया था क्या
ये आँखें बिल्कुल वैसी हैंजैसी मिरे ख़्वाब में आती थीं
शहसवारनन्हा-मुन्ना शहसवार
हर तरफ़ कतरनें हैंवो गुड़िया यहीं थी मगर अब दिखाई नहीं दे रही
इक मुद्दत से इक कूज़ा-गरघूमते चाक पर
वक़्त की आस्तीनों में पलते हुए क़हक़हेझाड़ दो
बहुत साल पहलेमैं इक भीगती रात में
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books