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नज़्म
शहाब जाफ़री
नज़्म
सय्यद वहीदुद्दीन सलीम
नज़्म
चार-सू राह-ए-सफ़र पर दौड़ती है जब नज़र
ज़िंदगी को कारवाँ-दर-कारवाँ पाता हूँ मैं
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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चार-सू राह-ए-सफ़र पर दौड़ती है जब नज़र
ज़िंदगी को कारवाँ-दर-कारवाँ पाता हूँ मैं