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नज़्म
दुनिया में ले के शाह से ऐ यार ता-फ़क़ीर
ख़ालिक़ न मुफ़्लिसी में किसी को करे असीर
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
लफ़्ज़ों में रक़्स-ओ-रंग-ओ-रवानी तुझी से है
फ़क़्र-ए-गदा में फ़र्र-ए-कियानी तुझी से है
जोश मलीहाबादी
नज़्म
आया हमारे देस में इक ख़ुश-नवा फ़क़ीर
आया और अपनी धुन में ग़ज़ल-ख़्वाँ गुज़र गया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
भूल जाएँगे इबादत ख़ानक़ाहों में फ़क़ीर
हश्र-दर-आग़ोश हो जाएगी दुनिया की फ़ज़ा
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
हक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी है
मर्द ओ ज़न तिफ़्ल ओ जवाँ ख़ुर्द ओ कलाँ पीर ओ फ़क़ीर
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
जिन में रहते हैं महाजन जिन में बस्ते हैं अमीर
जिन में काशी के बरहमन जिन में काबे के फ़क़ीर