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नज़्म
तिरे पास किताब इलाही है तू नित-नित इस को खोल
मिरे दिल में कातिब रहता है मिरे साथ रहा है बोल
सदा अम्बालवी
नज़्म
गिला करता रहा तू कातिब-ए-तक़दीर से नाहक़
मिला है जो तुझे कितनों को मिलता है ज़माने में
सदा अम्बालवी
नज़्म
हर नस्ल इक फ़स्ल है धरती की आज उगती है कल कटती है
जीवन वो महँगी मदिरा है जो क़तरा क़तरा बटती है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
सो मैं ने साहत-ए-दीरोज़ में डाला है अब डेरा
मिरे दीरोज़ में ज़हर-ए-हलाहल तेग़-ए-क़ातिल है
जौन एलिया
नज़्म
हबीब जालिब
नज़्म
ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म में
क़ातिल को जो न टोके वो क़ातिल के साथ है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
ख़ाक-ए-सहरा पे जमे या कफ़-ए-क़ातिल पे जमे
फ़र्क़-ए-इंसाफ़ पे या पा-ए-सलासिल पे जमे