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नज़्म
जन्नत-ए-शौक़ थी बेगाना-ए-आफ़ात-ए-सुमूम
दर्द जब दर्द न हो काविश-ए-दरमाँ मालूम
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
मेरी उम्मीदों का हासिल मिरी काविश का सिला
एक बे-नाम अज़िय्यत के सिवा कुछ भी नहीं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
उनके दिल जब होंगे याद-ए-मासियत से पाश पाश
तेरे रुख़ पर एक भी होगी न माज़ी की ख़राश
जोश मलीहाबादी
नज़्म
जोश मलीहाबादी
नज़्म
मजीद अमजद
नज़्म
तेरी फ़ुर्क़त दिल-ए-मायूस पे इक तुर्फ़ा सितम
तेरी फ़ुर्क़त सबब-ए-काविश-ओ-बेदारी-ए-ग़म
शकील बदायूनी
नज़्म
तेरी चुटकी की सदा है या कि शैताँ का ख़रोश
रहम कर इंसानियत पर ओ बुत-ए-इस्मत-फ़रोश
माहिर-उल क़ादरी
नज़्म
नया दिन रोज़ मुझ को कितना पीछे फेंक देता है
ये आज अंदाज़ा होता है कि मैं आहिस्ता आहिस्ता
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
हाँ पस-अज़-फ़रियाद-ओ-क़ल्ब-ए-दहर की लर्ज़िश के बा'द
दिन की तुम आलूद-ज़र्द-ओ-लाला-गूँ काविश के बा'द
मीराजी
नज़्म
ये जोहद-ओ-कश्मकश ये ख़रोश-ए-जहाँ भी देख
अदबार की, सरों पे घनी बदलियाँ भी देख