aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "koshish"
मैं उस की आँखों को देखता रहता हूँमगर मेरी समझ में कुछ नहीं आतामैं उस की बातों को सुनता रहता हूँमगर मेरी समझ में कुछ नहीं आताअब अगर वो कभी मुझ से मिलेतो मैं उस से बात नहीं करूँगाउस की तरफ़ देखूँगा भी नहींमैं कोशिश करूँगामेरा दिल कहीं और मुब्तला हो जाएअब मैं उसे याद बना देना चाहता हूँ
ये जश्न ये हंगामे दिलचस्प खिलौने हैंकुछ लोगों की कोशिश है कुछ लोग बहल जाएँजो वादा-ए-फ़र्दा पर अब टल नहीं सकते हैंमुमकिन है कि कुछ अर्सा इस जश्न पे टल जाएँ
रात सुनसान थी बोझल थीं फ़ज़ा की साँसेंरूह पर छाए थे बे-नाम ग़मों के साएदिल को ये ज़िद थी कि तू आए तसल्ली देनेमेरी कोशिश थी कि कम्बख़्त को नींद आ जाए
खोल आँख ज़मीं देख फ़लक देख फ़ज़ा देख!मशरिक़ से उभरते हुए सूरज को ज़रा देख!इस जल्वा-ए-बे-पर्दा को पर्दा में छुपा देख!अय्याम-ए-जुदाई के सितम देख जफ़ा देख!बेताब न हो मार्का-ए-बीम-ओ-रजा देख!हैं तेरे तसर्रुफ़ में ये बादल ये घटाएँये गुम्बद-ए-अफ़्लाक ये ख़ामोश फ़ज़ाएँये कोह ये सहरा ये समुंदर ये हवाएँथीं पेश-ए-नज़र कल तो फ़रिश्तों की अदाएँआईना-ए-अय्याम में आज अपनी अदा देख!समझेगा ज़माना तिरी आँखों के इशारे!देखेंगे तुझे दूर से गर्दूं के सितारे!नापैद तिरे बहर-ए-तख़य्युल के किनारेपहुँचेंगे फ़लक तक तिरी आहों के शरारेतामीर-ए-ख़ुदी कर असर-ए-आह-ए-रसा देखख़ुर्शीद-ए-जहाँ-ताब की ज़ौ तेरे शरर मेंआबाद है इक ताज़ा जहाँ तेरे हुनर मेंजचते नहीं बख़्शे हुए फ़िरदौस नज़र मेंजन्नत तिरी पिन्हाँ है तिरे ख़ून-ए-जिगर मेंऐ पैकर-ए-गुल कोशिश-ए-पैहम की जज़ा देख!नालंदा तिरे ऊद का हर तार अज़ल सेतू जिंस-ए-मोहब्बत का ख़रीदार अज़ल सेतू पीर-ए-सनम-ख़ाना-ए-असरार अज़ल सेमेहनत-कश ओ ख़ूँ-रेज़ ओ कम-आज़ार अज़ल सेहै राकिब-ए-तक़दीर-ए-जहाँ तेरी रज़ा देख!
मुझे मत बतानाकि तुम ने मुझे छोड़ने का इरादा किया थातो क्यूँऔर किस वज्ह सेअभी तो तुम्हारे बिछड़ने का दुख भी नहीं कम हुआअभी तो मैंबातों के वादों के शहर-ए-तिलिस्मात मेंआँख पर ख़ुश-गुमानी की पट्टी लिएतुम को पेड़ों के पीछे दरख़्तों के झुण्डऔर दीवार की पुश्त पर ढूँडने में मगन हूँकहीं पर तुम्हारी सदा और कहीं पर तुम्हारी महकमुझ पे हँसने में मसरूफ़ हैअभी तक तुम्हारी हँसी से नबर्द-आज़मा हूँऔर इस जंग मेंमेरा हथियारअपनी वफ़ा पर भरोसा है और कुछ नहींउसे कुंद करने की कोशिश न करनामुझे मत बताना.....
यज़ीद नक़्शा-ए-जौर-ओ-जफ़ा बनाता हैहुसैन उस में ख़त-ए-कर्बला बनाता हैयज़ीद मौसम-ए-इस्याँ का ला-'इलाज मरज़हुसैन ख़ाक से ख़ाक-ए-शिफ़ा बनाता हैयज़ीद काख़-ए-कसाफ़त की डोलती बुनियादहुसैन हुस्न की हैरत-सरा बनाता हैयज़ीद तेज़ हवाओं से जोड़ तोड़ में गुमहुसैन सर पे बहन के रिदा बनाता हैयज़ीद लिखता है तारीकियों को ख़त दिन भरहुसैन शाम से पहले दिया बनाता हैयज़ीद आज भी बनते हैं लोग कोशिश सेहुसैन ख़ुद नहीं बनता ख़ुदा बनाता है
रोज़-ए-अज़ल से वो भी मुझ तक आने की कोशिश में हैरोज़-ए-अज़ल से मैं भी उस से मिलने की कोशिश में हूँलेकिन मैं और वो हम दोनोंअपनी अपनी शक्लों जैसे लाखों गोरख धंदों मेंचुप चुप और हैरान खड़े हैंकौन है मैंऔर कौन है तूबस इस दर्द में खोए हुए हैंसुब्ह को मिलने वाले समझेंजैसे ये तो रोए हुए हैं
मेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के उजयारे वतनहर आँख के तारे वतनगुल-पोश तेरी वादियाँफ़रहत-निशाँ राहत-रसाँतेरे चमन-ज़ारों पे हैगुलज़ार-ए-जन्नत का गुमाँहर शाख़ फूलों की छड़ीहर नख़्ल-ए-तूबा है यहाँकौसर के चश्मे जा-ब-जातसनीम हर आब-ए-रवाँहर बर्ग रूह-ए-ताज़गीहर फूल जान-ए-गुल्सिताँहर बाग़ बाग़-ए-दिल-कशीहर बाग़ बाग़-ए-बे-ख़िज़ाँदिलकश चरागाहें तिरीढोरों के जिन में कारवाँअंजुम-सिफ़त गुलहा-ए-नौहर तख़्ता-ए-गुल आसमाँनक़्श-ए-सुरय्या जा-ब-जाहर हर रविश इक कहकशाँतेरी बहारें दाइमीतेरी बहारें जावेदाँतुझ में है रूह-ए-ज़िंदगीपैहम रवाँ पैहम दवाँदरिया वो तेरे तुंद-ख़ूझीलें वो तेरी बे-कराँशाम-ए-अवध के लब पे हैहुस्न-ए-अज़ल की दास्ताँकहती है राज़-ए-सरमदीसुब्ह-ए-बनारस की ज़बाँउड़ता है हफ़्त-अफ़्लाक परउन कार-ख़ानों का धुआँजिन में हैं लाखों मेहनतीसनअत-गरी के पासबाँतेरी बनारस की ज़रीरश्क-ए-हरीर-ओ-परनियाँबीदर की फ़नकारी में हैंसनअत की सब बारीकियाँअज़्मत तिरे इक़बाल कीतेरे पहाड़ों से अयाँदरियाओं का पानी, तरीतक़्दीस का अंदाज़ा-दाँक्या 'भारतेंदु' ने कियागंगा की लहरों का बयाँ'इक़बाल' और चकबस्त हैंअज़्मत के तेरी नग़्मा-ख़्वाँ'जोश' ओ 'फ़िराक़' ओ 'पंत' हैंतेरे अदब के तर्जुमाँ'तुलसी' ओ 'ख़ुसरव' हैं तेरीतारीफ़ में रत्ब-उल-लिसाँगाते हैं नग़्मा मिल के सबऊँचा रहे तेरा निशाँमेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के उजियारे वतनहर आँख के तारे वतनतेरे नज़ारों के नगींदुनिया की ख़ातम में नहींसारे जहाँ में मुंतख़बकश्मीर की अर्ज़-ए-हसींफ़ितरत का रंगीं मोजज़ाफ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मींफ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मींहाँ हाँ हमीं अस्त ओ हमींसरसब्ज़ जिस के दश्त हैंजिस के जबल हैं सुर्मगींमेवे ब-कसरत हैं जहाँशीरीं मिसाल-ए-अंग्बींहर ज़ाफ़राँ के फूल मेंअक्स-ए-जमाल-ए-हूरईंवो मालवे की चाँदनीगुम जिस में हों दुनिया-ओ-दींइस ख़ित्ता-ए-नैरंग मेंहर इक फ़ज़ा हुस्न-आफ़रींहर शय में हुस्न-ए-ज़िंदगीदिलकश मकाँ दिलकश ज़मींहर मर्द मर्द-ए-ख़ूब-रूहर एक औरत नाज़नींवो ताज की ख़ुश-पैकरीहर ज़ाविए से दिल-नशींसनअत-गरों के दौर कीइक यादगार-ए-मरमरींहोती है जो हर शाम कोफ़ैज़-ए-शफ़क़ से अहमरींदरिया की मौजों से अलगया इक बत-ए-नज़्ज़ारा-बींया ताएर-ए-नूरी कोईपर्वाज़ करने के क़रींया अहल-ए-दुनिया से अलगइक आबिद-ए-उज़्लत-गुज़ीनक़्श-ए-अजंता की क़समजचता नहीं अर्ज़ंग-ए-चींशान-ए-एलोरा देख करझुकती है आज़र की जबींचित्तौड़ हो या आगराऐसे नहीं क़िलए कहींबुत-गर हो या नक़्क़ाश होतू सब की अज़्मत का अमींमेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के अजियारे वतनहर आँख के तारे वतनदिलकश तिरे दश्त ओ चमनरंगीं तिरे शहर ओ चमनतेरे जवाँ राना जवाँतेरे हसीं गुल पैरहनइक अंजुमन दुनिया है येतू इस में सद्र-ए-अंजुमनतेरे मुग़न्नी ख़ुश-नवाशाएर तिरे शीरीं-सुख़नहर ज़र्रा इक माह-ए-मुबींहर ख़ार रश्क-ए-नस्तरींग़ुंचा तिरे सहरा का हैइक नाफ़ा-ए-मुश्क-ए-ख़ुतनकंकर हैं तेरे बे-बहापत्थर तिरे लाल-ए-यमनबस्ती से जंगल ख़ूब-तरबाग़ों से हुस्न अफ़रोज़ बनवो मोर वो कब्क-ए-दरीवो चौकड़ी भरते हिरनरंगीं-अदा वो तितलियाँबाँबी में वो नागों के फनवो शेर जिन के नाम सेलरज़े में आए अहरमनखेतों की बरकत से अयाँफ़ैज़ान-ए-रब्ब-ए-ज़ुल-मिननचश्मों के शीरीं आब सेलज़्ज़त-कशाँ काम-ओ-दहनताबिंदा तेरा अहद-ए-नौरौशन तिरा अहद-ए-कुहनकितनों ने तुझ पर कर दियाक़ुर्बान अपना माल धनकितने शहीदों को मिलेतेरे लिए दार-ओ-रसनकितनों को तेरा इश्क़ थाकितनों को थी तेरी लगनतेरे जफ़ा-कश मेहनतीरखते हैं अज़्म-ए-कोहकनतेरे सिपाही सूरमाबे-मिस्ल यक्ता-ए-ज़मन'भीषम' सा जिन में हौसला'अर्जुन' सा जिन में बाँकपनआलिम जो फ़ख़्र-ए-इल्म हैंफ़नकार नाज़ाँ जिन पे फ़न'राय' ओ 'बोस' ओ 'शेरगिल''दिनकर', 'जिगर' 'मैथली-शरण''वलाठोल', 'माहिर', भारती'बच्चन', 'महादेवी', 'सुमन''कृष्णन', 'निराला', 'प्रेम-चंद''टैगोर' ओ 'आज़ाद' ओ 'रमन'मेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के अजियारे वतनहर आँख के तारे वतनखेती तिरी हर इक हरीदिलकश तिरी ख़ुश-मंज़रीतेरी बिसात-ए-ख़ाक केज़र्रे हैं महर-ओ-मुश्तरीझेलम कावेरी नाग वोगंगा की वो गंगोत्रीवो नर्बदा की तमकनतवो शौकत-ए-गोदावरीपाकीज़गी सरजू की वोजमुना की वो ख़ुश-गाैहरीदुल्लर्बा आब-ए-नील-गूँकश्मीर की नीलम-परीदिलकश पपीहे की सदाकोयल की तानें मद-भरीतीतर का वो हक़ सिर्रहुतूती का वो विर्द-ए-हरीसूफ़ी तिरे हर दौर मेंकरते रहे पैग़म्बरी'चिश्ती' ओ 'नानक' से मिलीफ़क़्र-ओ-ग़िना को बरतरीअदल-ए-जहाँगीरी में थीमुज़्मर रेआया-पर्वरीवो नव-रतन जिन से हुईतहज़ीब-ए-दौर-ए-अकबरीरखते थे अफ़्ग़ान-ओ-मुग़लइक सौलत-ए-अस्कंदरीरानाओं के इक़बाल कीहोती है किस से हम-सरीसावंत वो योद्धा तिरेतेरे जियाले वो जरीनीती विदुर की आज तककरती है तेरी रहबरीअब तक है मशहूर-ए-ज़माँ'चाणक्य' की दानिश-वरीवयास और विश्वामित्र सेमुनियों की शान-ए-क़ैसरीपातंजलि ओ साँख सेऋषियों की हिकमत-पर्वरीबख़्शे तुझे इनआम-ए-नौहर दौर चर्ख़-ए-चम्बरीख़ुश-गाैहरी दे आब कोऔर ख़ाक को ख़ुश-जौहरीज़र्रों को महर-अफ़्शानियाँक़तरों को दरिया-गुस्तरीमेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के अजियारे वतनहर आँख के तारे वतनतू रहबर-ए-नौ-ए-बशरतू अम्न का पैग़ाम-बरपाले हैं तू ने गोद मेंसाहिब-ख़िरद साहिब-ए-नज़रअफ़ज़ल-तरीं इन सब में हैबापू का नाम-ए-मो'तबरहर लफ़्ज़ जिस का दिल-नशींहर बात जिस की पुर-असरजिस ने लगाया दहर मेंनारा ये बे-ख़ौफ़-ओ-ख़तरबे-कार हैं तीर-ओ-सिनाँबे-सूद हैं तेग़-ओ-तबरहिंसा का रस्ता झूट हैहक़ है अहिंसा की डगरदरमाँ है ये हर दर्द काये हर मरज़ का चारा-गरजंगाह-ए-आलम में कोईइस से नहीं बेहतर सिपरकरता हूँ मैं तेरे लिएअब ये दुआ-ए-मुख़्तसररौनक़ पे हों तेरे चमनसरसब्ज़ हों तेरे शजरनख़्ल-ए-उमीद-ए-बेहतरीहर फ़स्ल में हो बारवरकोशिश हो दुनिया में कोईख़ित्ता न हो ज़ेर-ओ-ज़बरतेरा हर इक बासी रहेनेको-सिफ़त नेको-सियरहर ज़न सलीक़ा-मंद होहर मर्द हो साहिब-हुनरजब तक हैं ये अर्ज़ ओ फ़लकजब तक हैं ये शम्स ओ क़मरमेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के उजयारे वतनहर आँख के तारे वतन
अगर रहा ये फूलबहुत देर तकतो कोशिश करूँगातुम्हें बुलाने कीवहीं परजहाँ तुम्हारे जाने के ब'अदये फूल खिला है
क़ुब्ला-ख़ान तुम हार गए हो!और तुम्हारे टुकड़ों पर पलने वाला लालची मारको-पोलो.....जीत गया हैअकबर-ए-आज़म! तुम को मग़रिब की जिस अय्यारा ने तोहफ़े भेजे थेऔर बड़ा भाई लिक्खा थाउस के कुत्ते भी इन लोगों से अफ़ज़ल हैंजो तुम्हें महा-बली और ज़िलुल्लाह कहा करते थेमशरिक़ कया था?जिस्म से ऊपर उठने की इक ख़्वाहिश थीशहवत और जिबिल्लत की तारीकी मेंइक दिया जलाने की कोशिश थी!मैं सोच रहा हूँ, सूरज मशरिक़ से निकला था(मशरिक़ से जाने कितने सूरज निकले थे)लेकिन मग़रिब हर सूरज को निगल गया है
उस की हर बातहर इशारेहर किनाए को मैं आसानी सेसमझ लेता थालेकिन पता नहीं क्यूँ उस नेमेरे लिखे हुए पुराने ख़ुतूत मेंसोए हुए बे-क़ुसूर लफ़्ज़ों कोअपनी लाल रंग की लिपस्टिक सेहरा करने की कोशिश की हैक्यूँ
जब तुम मुझे सुनोये कहते हुएएक ख़ूब-सूरत लड़की पे मरनाकितना आसान हैऔर उसी के लिए मर जानामैं पसंद करता हूँऔर इस के बादतुम मुझे देखोकई बरस तकअपने टूटे हुए दिल को जोड़तेगिरे हुए सितारों कोदोबारा आसमान में टाँकतेमिट्टी में मिले हुए फूलों कोफिर से खिलाने की कोशिश करतेएक ख़ूब-सूरत लड़की के लिएमोहब्बत में देर हो सकती है
कितने अल्फ़ाज़ हैंजो मिरी उँगलियों के हर इक पोर मेंइक समुंदर की मानिंद बंद हैंसमुंदर बहुत ही ग़ुस्सैला समुंदरसमुंदर वो जो मुंतज़िर हैकि कब तेरे होंटों के दोनों सिरेमुस्कुराहट की कोशिश में खिचने लगेंऔर रुख़्सार में पेच-ओ-ख़म डाल देंएक शाइ'र जो आँखें मसलने लगेतो हँसेऔर समुंदरउबलने लगे
सारे दिन की थकी,वीरान और बे-मसरफ़ रात कोएक अजीब मश्ग़ला हाथ आ गया हैअब वो!सारे शहर की आवारा परछाइयों कोजिस्म देने की कोशिश में मसरूफ़ हैमुझे मालूम हैअगर गुम-नाम परछाइयों कोउन की पहचान मिल गईतो शहर के मुअज़्ज़ज़ और इबादत-गुज़ार शरीफ़-ज़ादेहम-शक्ल परछाइयों के ख़ौफ़ सेपरछाइयों में तब्दील हो जाएँगेऔरबे-मसरफ़ दिन भर की थकी हुई रात कोएक और मश्ग़ला मिल जाएगा
मुझे क्या ख़बर वक़्त के देवता की हसीं रथ के पहियों तले पिस चुके हैंमुक़द्दर के कितने खिलौने ज़मानों के हंगामे सदियों के सद-हा हयूलेमुझे क्या तअल्लुक़ मेरी आख़िरी साँस के बाद भी दोश-ए-गीती पे मचलेमह ओ साल के ला-ज़वाल आब-शार-ए-रवाँ का वो आँचल जो तारों को छू लेमगर आह ये लम्हा-ए-मुख़्तसर जो मिरी ज़िंदगी मेरा ज़ाद-ए-सफ़र हैमिरे साथ है मेरे बस में है मेरी हथेली पे है ये लबा-लब प्यालायही कुछ है ले दे के मेरे लिए इस ख़राबात-ए-शाम-ओ-सहर में यही कुछये इक मोहलत-ए-काविश-ए-दर्द-ए-हस्ती ये इक फ़ुर्सत-ए-कोशिश-ए-आह-ओ-नाला
मैं मुसव्विर हूँपर तुझ से नादिम हूँ मैंकि तिरे तुझ से ख़ाके बनाने की मैंअब तलक ये इक्कावनवीं कोशिश भी पूरी नहीं कर सका हूँ
मैंअपनीजानिबसे पूरी कोशिशतो कर रहा हूँमगर नतीजेख़िलाफ़ आएँ तो क्या करूँ मैं
इतवार की दोपहर तो हमेशा ही अच्छी होती हैबिल्कुल तुम्हारी तरहबे-फ़िक्र बे-परवाह आज़ादमैं ने भी हमेशा इसे अपने ही तरीक़े से बिताया हैपर जाने क्यूँकुछ अर्से से जब भी ये सुकून भरा वक़्त अपने साथ बिताने की कोशिश कीतुम दूर-दराज़ के वक़्तों से निकल के चुप-चाप मेरे क़रीब बैठ जाते होमेरे हाथों की खुली किताब बंद कर केअपने ही क़िस्से सुनाने लगते होदिसम्बर की सर्दीबारिश की बूँदेऔर इतवार की दोपहरवही क़िस्सा जो तुम ने जिया था कभीमेरे साथलग-भग हर हफ़्ते दोहराते होऔर मुझे एहसास भी नहीं होता कि मैं क़ैद हूँकुछ आज़ाद से लम्हों में हमेशा के लिए
जहाँ में हर तरफ़ है इल्म ही की गर्म-बाज़ारीज़मीं से आसमाँ तक बस इसी का फ़ैज़ है जारीयही सरचश्मा-ए-असली है तहज़ीब-ओ-तमद्दुन काबग़ैर इस के बशर होना भी है इक सख़्त बीमारीबनाता है यही इंसान को कामिल-तरीन इंसाँसिखाता है यही अख़्लाक़ ओ ईसार ओ रवा-दारीयही क़ौमों को पहुँचाता है बाम-ए-औज-ओ-रिफ़अत परयही मुल्कों के अंदर फूँकता है रूह-ए-बेदारीइसी के नाम का चलता है सिक्का सारे आलम मेंइसी के सर पे रहता है हमेशा ताज-ए-सरदारीइसी के सब करिश्मे ये नज़र आते हैं दुनिया मेंइसी के दम से रौनक़ आलम-ए-इम्काँ की है सारीये ला-सिलकी, ये टेलीफ़ोन ये रेलें, ये तय्यारेये ज़ेर-ए-आब ओ बाला-ए-फ़लक इंसाँ की तर्रारीहुदूद-ए-इस्तवा क़ुतबैन से यूँ हो गए मुदग़मकि है अब रुबअ मस्कों जैसे घर की चार-दीवारीसमुंदर हो गए पायाब सहरा बिन गए गुलशनकिया साइंस ने भी ए'तराफ़-ए-इज्ज़-ओ-नाचारीबुख़ार ओ बर्क़ का जर्रार लश्कर है अब आमादाउगलवा ले ज़मीन ओ आसमाँ की दौलतें सारीग़रज़ चारों तरफ़ अब इल्म ही की बादशाही हैकि उस के बाज़ूओं में क़ुव्वत-ए-दस्त-ए-इलाही हैनिगाह-ए-ग़ौर से देखो अगर हालात-ए-इंसानीतो हो सकता है हल ये उक़्दा-ए-मुश्किल ब-आसानीवही क़ौमें तरक़्क़ी के मदारिज पर हैं फाएक़-तरकि है जिन में तमद्दुन और सियासत की फ़रावानीइसी के ज़ोम में है जर्मनी चर्ख़-ए-तफ़ाख़ुर परइसी के ज़ोर पर मिर्रीख़ का हम-सर है जापानीइसी की क़ुव्वत-ए-बाज़ू पे है मग़रूर अमरीकाइसी के बिल पर लड़की हो रही है रुस्तम-ए-सानीइशारे पर इसी के नक़्ल-ओ-हरकत है सब इटली कीइसी के ताबा-ए-फ़रमान हैं रूसी ओ ईरानीइसी के जुम्बिश-ए-अबरू पे है इंग्लैण्ड का ग़र्राइसी के हैं सब आवुर्दे फ़्रांसीसी ओ एल्बानीकोई मुल्क अब नहीं जिन में ये जौहर हो न रख़्शंदान ग़ाफ़िल इस से चीनी हैं न शामी हैं न अफ़्ग़ानीबग़ैर इस के जो रहना चाहते हैं इस ज़माने मेंसमझ रक्खें फ़ना उन के लिए है हुक्म-ए-रब्बानीज़माना फेंक देगा ख़ुद उन्हें क़अ'र-ए-हलाकत मेंवो अपने हाथ से होंगे ख़ुद अपनी क़ब्र के बानीज़माने में जिसे हो साहिब-ए-फ़तह-ओ-ज़फ़र होनाज़रूरी है उसे इल्म-ओ-हुनर से बहरा-वर होनातरक़्क़ी की खुली हैं शाहराहें दहर में हर सूनज़र आता है तहज़ीब-ओ-तमद्दुन से जहाँ ममलूचले जाते हैं उड़ते शहसवारान-ए-फ़लक-पैमाख़िराज-ए-तहनियत लेते हुए करते हुए जादूगुज़रते जा रहे हैं दूसरों को छोड़ते पीछेकभी होता है सहरा मुस्तक़र उन का कभी टापूकमर बाँधे हुए दिन रात चलने पर हैं आमादादिमाग़ अफ़्कार से और दिल वुफ़ूर-ए-शौक़ से मलूलअलग रह कर ख़याल-ए-ज़हमत ओ एहसास-ए-राहत सेलगे हैं अपनी अपनी फ़िक्र में बा-ख़ातिर-ए-यकसूमगर हम हैं कि असलन हिस नहीं हम को कोई इस कीहमारे पा-ए-हिम्मत इन मराहिल में हैं बे-क़ाबूजहाँ पहला क़दम रक्खा था रोज़-ए-अव्वलीं हम नेनहीं सरके इस अपने असली मरकज़ से ब-क़द्र-ए-मूये हालत है कि हम पर बंद है हर एक दरवाज़ानज़र आता नहीं हरगिज़ कोई उम्मीद का पहलूमगर वा-हसरता फिर भी हम अपने ज़ोम-ए-बातिल मेंसमझते हैं ज़माने भर से आगे ख़ुद को मंज़िल मेंज़रूरत है कि हम में रौशनी हो इल्म की पैदानज़र आए हमें भी ताकि अस्ल-ए-हालत-ए-दुनियाहमें मालूम हो हालात अब क्या हैं ज़माने केहमारे साथ का जो क़ाफ़िला था वो कहाँ पहुँचाजो पस्ती में थे अब वो जल्वा-गर हैं बाम-ए-रिफ़अत परजो बालक बे-निशाँ थे आज है इन का अलम बरपाहमारी ख़ूबियाँ सब दूसरों ने छीन लीं हम सेज़माने ने हमें इतना झिंझोड़ा कर दिया नंगारवा-दारी, उख़ुव्वत, दोस्ती, ईसार, हमदर्दीख़्याल-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, दर्द-ए-क़ौम, अंदेशा-ए-फ़र्दाये सब जौहर हमारे थे कभी ऐ वाए-महरूमीबने हैं ख़ूबी-ए-क़िस्मत से जो अब ग़ैर का हिस्साअगर हो जाएँ राग़िब अब भी हम तालीम की जानिबतो कर सकते हैं अब भी मुल्क में हम ज़िंदगी पैदाबहुत कुछ वक़्त हम ने खो दिया है लेकिन इस पर भीअगर चाहें तो कर दें पेश-रौ को अपने हम पसपानिकम्मा कर दिया है काहिली ने गो हमें लेकिनरगों में है हमारी ख़ून अभी तक दौड़ता फिरताकोई मख़्फ़ी हरारत गर हमारे दिल को गरमा देहमारे जिस्म में फिर ज़िंदगी की रूह दौड़ा देवतन वालो बहुत ग़ाफ़िल रहे अब होश में आओउठो बे-दार हो अक़्ल-ओ-ख़िरद को काम में लाओतुम्हारे क़ौम के बच्चों में है तालीम का फ़ुक़्दाँये गुत्थी सख़्त पेचीदा है इस को जल्द सुलझाओयही बच्चे बिल-आख़िर तुम सभों के जा-नशीं होंगेतुम अपने सामने जैसा उन्हें चाहो बना जाओबहुत ही रंज-दह हो जाएगी उस वक़्त की ग़फ़लतकहीं ऐसा न हो मौक़ा निकल जाने पे पछताओये है कार-ए-अहम दो चार इस को कर नहीं सकतेख़ुदा-रा तुम भी अपने फ़र्ज़ का एहसास फ़रमाओये बोझ ऐसा नहीं जिस को उठा लें चार छे मिल करसहारा दो, सहारा दूसरों से इस में दिलवाओजो ज़ी-एहसास हैं हासिल करो तुम ख़िदमतें उन कीजो ज़ी-परवा हैं उन को जिस तरह हो उस तरफ़ लाओग़रज़ जैसे भी हो जिस शक्ल से भी हो ये लाज़िम हैतुम अपने क़ौम के बच्चों को अब तालीम दिलवाओअगर तुम मुस्तइ'द्दी को बना लोगे शिआर अपनायक़ीं जानो कि मुस्तक़बिल है बेहद शानदार अपनाख़ुदावंदा! दुआओं में हमारी हो असर पैदाशब-ए-ग़फ़लत हमारी फिर करे नूर-ए-सहर पैदाहमारे सारे ख़्वाबीदा क़वा बे-दार हो जाएँसर-ए-नौ हो फिर इन में ज़िंदगी की कर्र-ओ-फ़र्र पैदाहमें एहसास हो हम कौन थे और आज हम क्या हैंकरें माहौल-ए-मुल्की के लिए गहरी नज़र पैदामिला रक्खा है अपने जौहर-ए-कामिल को मिट्टी मेंहम अब भी ख़ाक से कर सकते हैं लाल-ओ-गुहर पैदाअगर चाहें तो हम मुश्किल वतन की दम में हल कर देंहज़ारों सूरतें कर सकते हैं हम कारगर पैदाब-ज़ाहिर गो हम इक तूदा हैं बिल्कुल राख का लेकिनअगर चाहें तो ख़ाकिस्तर से कर दें सौ शरर पैदावतन का नक्बत ओ अफ़्लास खो दें हम इशारे मेंजहाँ ठोकर लगा दें हो वहीं से कान-ए-ज़र पैदाहम इस मंज़िल के आख़िर पर पहुँच कर बिल-यक़ीं दम लेंअगर कुछ ताज़ा-दम हो जाएँ अपने हम-सफ़र पैदाजो कोशिश मुत्तहिद हो कर कहीं इक बार हो जाएयक़ीं है मुल्क की क़िस्मत का बेड़ा पार हो जाए
हमें शिकस्तें हुईं मगर हर शिकस्त महमेज़ हो गई हैहमारे साथी गिरे प रफ़्तार और कुछ तेज़ हो गई हैयहाँ की संगीन बे-हिसी मेंहमारी कोशिश का हाल ये हैकि जिस तरह कोई तीतरीइक ख़िज़ाँ-ज़दा बाग़-ए-बे-नुमू मेंभरी बहारों की जुस्तुजू मेंतबस्सुम-ए-गुल की आरज़ू मेंशजर शजर शाख़ शाख़ बेताब फिर रही होहमारे होते बहार आए न आए लेकिनहमें ये तस्कीन है कि हम नेहयात-ए-ना-पाएदार की एक एक साअ'तचमन की हैअत सँवारने में गुज़ार दी हैफ़ज़ा-ए-हस्ती निखारने में गुज़ार दी है
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books