aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "kushta-e-daur-e-jahaa.n"
दौर-ए-आहन में सुकूँ की जुस्तुजूदोपहर में अपने साए की तलाश
हम वही अहल-ए-जुनूँ अहल-ए-वफ़ा साहिब-दिलहम कि हर दौर में औराक़-ए-ज़माना के अमीं
और किस किस को ऐ 'दौर' इल्ज़ाम दूँकुछ पसीजा तो होगा ख़ुदा का भी दिल
लज़्ज़त-ए-जिस्म-ओ-जाँ है ये 'इश्क़-ए-जहाँऔर ये दहर है ज़ीनतों की दुकाँ
हयात सूद-ओ-ज़ियाँ से नविश्त रहती हैहयात सूद-ओ-ज़ियाँ के जहाँ का मेहवर है
मगर वतन भी छुटा 'दौर' दिल की दिल में रहीये बम्बई भी न हो ख़्वाब-ए-दीगराँ की तरह
इस जहान-ए-ख़राब में कि जहाँतेरी फ़िरऔनियत के चर्चे थे
ज़िंदगी तुझ से मैं प्यार करता रहाएक महबूबा-ए-दो-जहाँ की तरह
शहीद-ए-मिल्लत-ओ-वतन नबी के दीं की आबरूवो सर-ज़मीं मुझे हरम गिरा जहाँ तिरा लहू
कोई मुझ को दौर-ए-ज़मान-ओ-मकाँ से निकलने की सूरत बता दोकोई ये सुझा दो कि हासिल है क्या हस्ती-ए-राएगाँ से
आओ हम जश्न मनाएँ कि ये धरती अपनीये जहाँ-दीदा मु'अम्मर धरती
देख उस दौर-ए-जहाँ-सोज़ के वीराने मेंलज़्ज़त-ए-जिस्म के तूफ़ान ब-हर-गाम उठे
ख़ाकिस्तर-ए-दिल को है फिर शोला-ब-जाँ होनाहैरत का जहाँ होना हसरत का निशाँ होना
हक़ीक़त रोज़-ए-रौशन हैजहाँ हर इक चमकती रेत पानी बन नहीं सकती
बख़्त सोए हैं बहुत जाग के ऐ दौर-ए-ज़माँन अभी नींद के मातों को जगाना हरगिज़
वो अहद-ए-शादमानी वो इत्र-ए-ज़िंदगानीऐ दौर-ए-आसमानी वापस कहीं से लादे
फ़ना के बाद बक़ा का है जाँ-फ़ज़ा मुज़्दाअटल है आदत-ए-दौर-ए-ज़माँ हुआ सो हुआ
वहशत-ए-दौर-ए-सियासत पे हुआ करती थी बहसऔर क़लम हँसते हुए ज़ाविए बन जाते थे
फिर सर पर अब्र-ए-दौर-ए-जुनूँ है घिरा हुआफिर दिल में बू-ए-ज़ुल्फ़ परेशाँ है क्या करूँ
मआल-ए-अहद-ए-वफ़ा है फ़िराक़-ए-दीदा-ओ-दिलनक़ीब-ए-दौर-ए-गुज़िश्ता है दौर-ए-मौजूदा
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