aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "night"
तो वो बार्बी नाईट थीतुझ को कैसे बताऊँ
नींद मेरे आसाब पे सवार हो चुकी हैउमीद ने दामन झटक कर
नई तहज़ीब के शहकार-ए-अज़ीम!तेरी पुर-कैफ़ ओ तरब-ख़ेज़ फ़ज़ाओं को सलाम!
रात का वक़्त हैकोई आहट न कर
जनवरी की सर्दी मेंयार शब-नवर्दी में
दूर एक कमरे मेंनाईट बल्ब जलता है
एक ही मंज़र को घूरतेजब नौकरी पर नाईट शिफ़्ट करते
फ़स्ल-ए-गुल महकी है फिर ग़ुंचा-दहन खुलता हैशाम ढलने लगी और शब का बदन खुलता है
क्यूँ महक उठता न ख़ुश्बू से दिमाग़-ए-आलमनिगहत-ए-गुलशन-ए-इसरार गुरु-नानक थे
तू भी मुझ को तोड़ के ख़ुश हैपागल
शुक्रियासब बाग़बानों का
जब तुम वो पढ़ना चाहते होजो मुझे लिखना नहीं आता
मैं ने चाहा था कोई उजाले सा हाथमेरी उँगली पकड़ कर मुझे आगे बढ़ना सिखाए
वो इश्क़ हैजो सफ़ेद बालों पे होंट रखे
हम वो नहीं जो तुम समझते होहम वो हैं जो तुम नहीं समझते
हम ने घर बनाने केना-मुराद चक्कर में
नज़्म मर गई उस दिनजब मैं ने बीस रूपे बचाने के लिए
मैं ने ख़ून-आलूद कपड़े तब धोए हैंजब मुझे मा'लूम नहीं था
ये जो दीवारें मैं ने गिरा दी हैंजो हाथ ज़ख़्मी किए हैं
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