आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "paikar"
नज़्म के संबंधित परिणाम "paikar"
नज़्म
हदफ़ होंगे तुम्हारा कौन तुम किस के हदफ़ होगे
न जाने वक़्त की पैकार में तुम किस तरफ़ होगे
जौन एलिया
नज़्म
उस शाम मुझे मालूम हुआ इस कार-गह-ए-ज़र्दारी में
दो भोली-भाली रूहों की पहचान भी बेची जाती है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
इश्क़ की मस्ती से है पैकर-ए-गिल ताबनाक
इश्क़ है सहबा-ए-ख़ाम इश्क़ है कास-उल-किराम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
पुख़्ता-तर है गर्दिश-ए-पैहम से जाम-ए-ज़िंदगी
है यही ऐ बे-ख़बर राज़-ए-दवाम-ए-ज़िंदगी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
सरापा रंग-ओ-बू है पैकर-ए-हुस्न-ओ-लताफ़त है
बहिश्त-ए-गोश होती हैं गुहर-अफ़्शानियाँ उस की
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
था सरापा रूह तू बज़्म-ए-सुख़न पैकर तिरा
ज़ेब-ए-महफ़िल भी रहा महफ़िल से पिन्हाँ भी रहा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जन्नत तिरी पिन्हाँ है तिरे ख़ून-ए-जिगर में
ऐ पैकर-ए-गुल कोशिश-ए-पैहम की जज़ा देख!