aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "saar-baa.n"
तू सुर्मा वर गुलू इंसाँसुलैमाँ सर-ब-ज़ानू और सबा वीराँ!
वक़्त तय्यार नज़र आता हैसर-बर-आवुर्दा सनोबर की घनी शाख़ों में
मिले हम जो अब के कई साल ब'अदतुम्हें भी मलामत मुझे भी मलाल
अलस्सबाह कि थी काएनात सर-ब-सुजूदफ़लक पे शोर-ए-अज़ाँ था ज़मीं पे बाँग-ए-दुरूद
वही नुक़ूश चार साल बा'द काँप जाएँगेमैं ग़ुर्बतों की क़ब्र में ख़मोश लौट जाऊँगी
आज इस शहर मेंशोरिशों की चटानें खड़ी
तुम सर-ए-बाम आ करउठाया हुआ हाथ अपना हिला कर
तमन्ना सर-ब-ज़ानू अपने वा'दों पर पशेमाँ है
ये किताबों की सफ़-ब-सफ़ जिल्देंकाग़ज़ों का फ़ुज़ूल इस्ती'माल
सर-ब-कफ़ हिन्द के जाँ-बाज़-ए-वतन लड़ते हैंतेग़-ए-नौ ले सफ़-ए-दुश्मन में घुसे पड़ते हैं
सब बाल पक गए हैं कमर हो गई है ख़मआँखों से सूझता तो है लेकिन बहुत ही कम
मुझ से सबबस ये कहते हैं
दुश्मन सारेबन गए यार
सारे मुक़द्दस हुजरों के अंदररूहें नहा कर हैं सर-ब-सज्दा
ज़मीन आसमान मंज़र सबबाएँ जानिब
कोई साज़ बनेअन-गिनत तार
गुज़रते वक़्त में साअत-ब-साअतनए पैराहनों में
जो सर-ब-कफ़ थे,गिरे पड़े हैं
उसे सर-ब-ज़ानू!''तो हम कुछ परेशान से हो गए
दोज़ख़ बन गया थाचंद साल बाद
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