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नज़्म
मेरी महबूब उन्हें भी तो मोहब्बत होगी
जिन की सन्नाई ने बख़्शी है उसे शक्ल-ए-जमील
साहिर लुधियानवी
नज़्म
फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता जी से जोड़ सुनाई हो
फ़र्ज़ करो अभी और हो इतनी आधी हम ने छुपाई हो
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
अहमद फ़राज़
नज़्म
इक़बाल अशहर
नज़्म
ख़्वाब-गर मैं भी नहीं
सूरत-गर-ए-सानी हूँ बस
हाँ मगर मेरी मईशत का सहारा ख़्वाब हैं!