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नज़्म
हम ने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या सीखा है
जुज़ तिरे और को समझाऊँ तो समझा न सकूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
चाहत से किसी की सीखा था ग़म सहना और आँसू पीना
लेकिन अब तो हर अश्क-ए-अलम आँखों से टपक ही जाता है
राबिया सुलताना नाशाद
नज़्म
मगर अब तक तरीक़-ए-बंदगी मुझ को नहीं आया
मिरे जज़्बों ने अब तक जज़्ब के मा'नी नहीं सीखे
सलमान बासित
नज़्म
ख़ुदावंद! भील क़बीले के लोग गोश्त खाना कब सीखे
जब उन के मुँह को ख़ून और दिल को ख़ौफ़-ए-ख़ुदा लग गया
नसरीन अंजुम भट्टी
नज़्म
ज़बाँ अपनी ज़बाँ मैं तुम को आख़िर कब सिखा पाया
अज़ाब-ए-सद-शमातत आख़िरश मुझ पर ही नाज़िल हो
जौन एलिया
नज़्म
उँगलियाँ उट्ठेंगी सूखे हुए बालों की तरफ़
इक नज़र देखेंगे गुज़रे हुए सालों की तरफ़