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शकेब जलाली

1934 - 1966 | पाकिस्तान

प्रसिद्ध पाकिस्तानी शायर। कम उम्र में आत्म हत्या की

प्रसिद्ध पाकिस्तानी शायर। कम उम्र में आत्म हत्या की

ग़ज़ल 59

शेर 41

आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे

तितलियाँ मंडला रही हैं काँच के गुल-दान पर

बद-क़िस्मती को ये भी गवारा हो सका

हम जिस पे मर मिटे वो हमारा हो सका

लोग देते रहे क्या क्या दिलासे मुझ को

ज़ख़्म गहरा ही सही ज़ख़्म है भर जाएगा

कोई भूला हुआ चेहरा नज़र आए शायद

आईना ग़ौर से तू ने कभी देखा ही नहीं

सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह

देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में

पुस्तकें 4

Kulliyat-e-Shakeb Jalaali

 

 

Roshni Ai Roshni

 

 

Shakeb Jalali

Ek Mutala

2009

Shakeb Jalali

Fan Aur Shakhsiyat

2006

 

वीडियो 7

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shakaib jalali: ghazal: dhoop kaheen شکیب جلالی: غزل: دھُوپ کہیں ہے

अज्ञात

आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो चार गिरे

अज्ञात

कनार-ए-आब खड़ा ख़ुद से कह रहा है कोई

अज्ञात

जहाँ तलक भी ये सहरा दिखाई देता है

चित्रा सिंह

जहाँ तलक भी ये सहरा दिखाई देता है

शकेब जलाली

मुजरिम

यही रस्ता मिरी मंज़िल की तरफ़ जाता है अज्ञात

मुरझा के काली झील में गिरते हुए भी देख

अज्ञात

ऑडियो 15

आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो चार गिरे

कोई इस दिल का हाल क्या जाने

ख़मोशी बोल उठ्ठे हर नज़र पैग़ाम हो जाए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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