ग़ज़ल 24

शेर 27

मुझे ख़बर थी इस घर में कितने कमरे हैं

मैं कैसे ले के वहाँ सारी दास्ताँ जाता

क्या नहीं जानता मुझे कोई

क्या नहीं शहर में वो घर बाक़ी

झाँकते रात के गरेबाँ से

हम ने सौ आफ़्ताब देखे हैं

ई-पुस्तक 1

कू बा कू

 

1976

 

ऑडियो 7

कहो तो आज बता दें तुम्हें हक़ीक़त भी

ख़्वाबों के आसरे पे बहुत दिन जिए हो तुम

जागते में भी ख़्वाब देखे हैं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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