ग़ज़ल 24

शेर 27

ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत हो मगर

पहले सा जोश पहले सी शिद्दत नहीं रही

कुछ तो अपने लिए भी रखना है

ज़ख़्म औरों को क्यूँ दिखाएँ सब

ये तमन्ना है कि अब और तमन्ना करें

शेर कहते रहें चुप चाप तक़ाज़ा करें

ई-पुस्तक 1

कू बा कू

 

1976

 

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