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इफ़्फ़त मोहानी का परिचय
पहचान: उपन्यासकार, कहानीकार और सामाजिक विषयों की सशक्त लेखिका
इफ़्फ़त मोहानी (वास्तविक नाम: सैयदा ख़ुर्शीद सुल्ताना) का जन्म 25 जुलाई 1934 को हैदराबाद में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से बी.ए., एम.ए. और बी.एड. की पढ़ाई विशेष सफलता के साथ पूरी की। बचपन से ही उनमें लेखन की रुचि थी और मात्र आठ वर्ष की उम्र में उनकी कहानियाँ बच्चों के पन्नों में प्रकाशित होने लगी थीं।
इफ़्फ़त मोहानी की रचनाओं में नैतिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और पारिवारिक समस्याएँ साफ़ दिखाई देती हैं। उनके उपन्यासों का मुख्य विषय स्त्री है—विशेष रूप से वह स्त्री जो परंपरा, परिवार और समाज के दबाव में अपने फैसले खुद नहीं कर पाती। उनकी कहानियों में स्त्री केवल पीड़ित नहीं, बल्कि संवेदनशील, सोचने-समझने वाली और सम्मानित व्यक्ति के रूप में सामने आती है।
उनका पहला उपन्यास ‘सितम के सहारे’ (1971) था, जो पहले मासिक पत्रिका ‘हरीम’ में किस्तों में छपा और बाद में पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ।
इफ़्फ़त मोहानी के उपन्यासों में तवायफ़, पत्नी, माँ, सौतेली माँ और समाज से ठुकराई गई स्त्री जैसे कई रूप देखने को मिलते हैं। वे स्त्री की स्वतंत्रता की समर्थक थीं, लेकिन बिना सीमा वाली या पश्चिमी ढंग की आज़ादी की पक्षधर नहीं थीं। उनके अनुसार स्त्री की आज़ादी नैतिकता, शालीनता और गरिमा के दायरे में होनी चाहिए।
1971 से 1995 के बीच उन्होंने 85 से अधिक उपन्यास लिखे, और कुल मिलाकर उनके उपन्यासों की संख्या लगभग सौ बताई जाती है। उनके अधिकांश उपन्यास नसीम बुक डिपो, लखनऊ से प्रकाशित हुए।
निधन: इफ़्फ़त मोहानी का निधन 16 नवंबर 2005 को हैदराबाद (दकन) में हुआ।
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