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जाफ़र मलीहाबादी

शेर 3

दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो

निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो

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वतन के जाँ-निसार हैं वतन के काम आएँगे

हम इस ज़मीं को एक रोज़ आसमाँ बनाएँगे

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अहल-ए-वतन शाम-ओ-सहर जागते रहना

अग़्यार हैं आमादा-ए-शर जागते रहना

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पुस्तकें 5

Goya Sahab-e-Saif-o-Qalam

 

1978

Mata-e-Fikr

 

1983

Meri Nazmein Mere Geet

 

1981

Meri Qaumi Nazmein

 

1988

Sang-o-Aahang

 

1976