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जिलानी बानो की कहानियाँ
ऐ दिल ऐ दिल
नादीदा महबूबा के इश्क़ में मुब्तिला होने की दिलचस्प दास्तान है। इसमें इंसान की नफ़्सियाती पेचीदगियों को सुंदर ढंग से बयान किया गया है। महमूद एक शर्मीला और भोला सा कॉलेज का छात्र है जबकि उसका दोस्त तारिक़ एक मनचले क़िस्म का नौजवान है, जो राह चलते लड़कियों पर फ़ब्तियाँ कसने और बालकनियों में खड़ी कुमारियों को देखकर आहें भरने से भी बाज़ नहीं आता। एक दिन तारिक़ ने अपनी आदत के अनुसार बालकनी में खड़ी एक लड़की को देखकर आहें भरनी शुरू कीं और फिर उसकी तारीफ़ों में क़सीदे पढ़ने शुरू कर दिए। महमूद पर उन तारीफ़ों का अजीब नफ़्सियाती असर हुआ। कुछ तो तारिक़ की वाकपटुता और कुछ अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा के आधार पर वो नादीदा महबूब की मुहब्बत में मुब्तिला होता गया। अपने ग़म को ग़लत करने की ख़ातिर उसने शायरी शुरू कर दी और बहुत जल्द उसकी गिनती शहर के मशहूर शायरों में होने लगी। शादी की तरफ़ से उसका दिल उचाट था लेकिन बहनों के आग्रह से मजबूर हो कर उसने शादी कर ली। तीन बच्चों की पैदाइश की बावजूद वो अपनी बीवी को मुहब्बत और तवज्जो न दे सका। दस साल के बाद जब तारिक़ उसके घर आता है और उसकी बीवी को देखता है तो ये रहस्य खुलता है कि महमूद जिस नादीदा महबूबा के फ़िराक़ में घुले जा रहे हैं वो उनकी यही बीवी है।
मोम की मरयम
किसी भी चीज़ की क़द्र तभी होती है जब हम उसे खो देते हैं। स्मृतियों के सहारे चलने वाली यह एक ऐसी ही कहानी है। अब वह नहीं है, लेकिन वह हर जगह है। उसे आयशा का ख़त मिला, जिसमें कु़दसिया की मौत का ज़िक्र था। कु़दसिया, मोम की मरियम की तरह जो हर दुख, तकलीफ़ और नागवार हालात को बर्दाश्त करती रही। वह उससे हमेशा नफ़रत करता रहा है और वह नज़र-अंदाज़ किए जाने के बाद भी उससे मोहब्बत करती रही।
एक दोस्त की ज़रूरत है
यह कहानी एक ऐसे कामयाब शख़्स की है, जो काफ़ी अमीर होकर भी अकेला है। उसे एक दोस्त की ज़रूरत है। इसके लिए वह अख़बार में इश्तिहार देता है। कुछ दोस्त उस इश्तिहार और उसके देने वाले का मज़ाक़ उड़ाते हैं, लेकिन अगले ही दिन इश्तिहार देने वाले के दिए गए पते पर उससे मिलने पहुँच जाते हैं। वहाँ वह सब एक के बाद एक उस शख़्स को अपनी विशेषताएँ बताते हैं और खु़द को उसकी दोस्ती के लिए पेश करते हैं लेकिन उसे तो किसी और ही दोस्त की तलाश होती है।
जन्नत की तलाश
यह कहानी मदरसे के एक मौलवी की रूदाद बयान करती है जो शरारत करते बच्चों को चुप कराने के लिए उन्हें जहन्नम का ख़ौफ़ दिखाता है। बच्चे उन्हें अपने घर के हालात बताते हैं और कहते हैं कि जिस जहन्नम की बात आप कर रहे हैं वही सब तो उनके घर में भी है। तभी कहीं बम का धमाका होता है और चारों तरफ आग फैल जाती है। मौलाना खु़दा से पूछते हैं कि जब तूने इन बच्चों के लिए दुनिया में ही जहन्नम बना दी है अब मैं इन्हें जन्नत की तलाश में कहाँ ले जाऊं?
बात फूलों की
एक फूल वाले के गिर्द घूमती यह कहानी है जो हमारे समाज और सामाजिक ढाँचे की दास्तान बयान करती है। कहानी उस बेरहम सामाजिक ताने बाने को बयाँ करती है जिसमें स्वार्थ अपने शिखर पर है। एक तरफ़ गाँव के निर्दोष लोगों की लाशें हैं तो दूसरी तरफ़ चुनाव में जीता एक प्रत्याशी अपनी जीत के जश्नके लिए फूलों का हार बनवा रहा है।
पराया घर
माद्दी दुनिया में खू़नी रिश्तों का मेयार भी दौलत ही है। एक्सीडेंट में घायल एक शख़्स के दिमाग़ पर चोट का ऐसा असर होता है कि उसे सब कुछ पराया लगने लगता है, यहाँ तक कि अपना घर और घर वाले भी। उसे विशेष देखभाल की ज़रूरत है, लेकिन घर का कोई व्यक्ति उसकी देखभाल के लिए उसके पास नहीं होता। घर का कोई व्यक्ति उसके पास तभी आते हैं जब उन्हें पेंशन के फ़ॉर्म पर दस्तख़त कराने होते हैं।
अजनबी चेहरे
यह एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसे महसूस होता है कि वह अपनी पहचान के चेहरों को भूलती जा रही है। लोगों के चेहरों को याद रखने के लिए वह उनकी बातों को याद करने लगती है. उसे अपने शौहर का चेहरा भी भूलता जा रहा है। एक दिन जब वह अपने शौहर के कहने पर सजती-संवरती है तो उसका शौहर उसे देखकर किसी और लड़की का नाम ले देता है और उसे लगता है कि उसका शौहर भी उसका चेहरा भूल गया है।
गुड़िया का घर
कहानी एक ऐसी लड़की की दास्तान को बयान करता है जो किसी से बहुत मोहब्बत करती है। वह उसके साथ शादी करने और अपने सपनों का घर बनाने और बसाने के बारे में सोचती है जिस तरह वह बचपन में गुड़ियों के लिए बनाया करती थी। मगर कुछ अरसा साथ रहने के बाद वह शख़्स उसे छोड़कर एक अमेरिकन लड़की के साथ चला जाता है।
अपने मरने का दुख
यह दुबई में काम करने वाले एक ऐसे शख़्स की कहानी है जिसे अपने मरने की ख़बर मिलती है। इस ख़बर से वो जिस क़दर परेशान ख़ुद के लिए होता है उससे कहीं ज़्यादा घर वालों के बारे में सोचकर परेशान होता है। जब वह अपने घर फ़ोन करता है और अपना नाम बदलकर बात करता है तो उसे पता चलता है कि उसकी बीवी और माँ-बाप उसकी मौत पर दुखी होने के बजाय उसकी मौत पर मिलने वाली रक़म के लिए आपस में लड़ रहे हैं।
स्कूटर वाला
यह एक संयुक्त परिवार के टूटने बिखरने की कहानी है। मोहसिन अपनी बीवी आबिदा के साथ अपने ख़ानदान से अलग रहने लगता है। उनका एक बच्चा है। बच्चा दिन में जिस वक़्त सोता है उसी वक़्त गली से एक स्कूटर वाला गुज़रता है, जिसकी आवाज़ सुनकर बच्चा उठ जाता है और रोने लगता है। इससे आबिदा बहुत परेशान होती है और पड़ोस में किसी पर बद्दुआ का असर जानकर स्कूटर वाले को बद्दुआ देती है। स्कूटर वाला अगले दिन नहीं आता। अपनी बद्दुआ का असर जानकर आबिदा पहले तो खुश होती है, लेकिन फिर वह इतनी परेशान होती है कि अपना हवास ही खो बैठती है।
यह शहर बिकाऊ है
यह कहानी एक ऐसे शहर कि है जो बिकाऊ है और उसे ख़रीदने वाला अपनी पसंद की हर चीज़ ख़रीद सकता है। शहर में मौजूद लीडर, मौलवी, पंडित और हर तरह की औरतें भी बिकने के लिए मौजूद हैं। ऐसा नहीं है कि यह शहर पहली बार बिक रहा है। इससे पहले भी इस शहर को बादशाहों, नवाबों और अंग्रेज़ों ने कई बार खरीदा है।
ड्रीम लैंड
औरत के जद्द-ओ-जहद, त्याग और शोषण की कहानी है। ड्रीम लैंड राधा किशन जागीरदार की कोठी का नाम है जो अपनी इमारत की साख बचाने के लिए जवाहिरात को बेच बेच कर इलेक्शन लड़ रहे हैं। नैना उनकी ख़ूबसूरत तरीन लड़की है और रहमान सेठ उनकी महबूबा निशात के ताजिर शौहर हैं। राधा किशन पच्चास हज़ार में नैना का भी सौदा कर लेते हैं और जब वो बच्चे की माँ बनने वाली होती है तो निशात नैना को उसकी वफ़ादार और राज़दार नौकरानी रोशनी के साथ मैसूर ले जाती है। वापसी पर बच्चा रोशनी से मंसूब हो जाता है, लेकिन तारा जो नैना की कज़न थी, हमेशा रौशनी पर तंज़ करती रहती थी और निचले तबक़े के आधार पर नफ़रत भी करती थी। राधा किशन जब इलेक्शन हार जाते हैं तो तारा के उकसाने पर राधा किशन रौशनी को मनहूस समझ बैठते हैं और घर से बाहर निकाल देने का हुक्म दे देते हैं।
पत्थर का शहज़ादा
आईए... आईए मैडम जी... छोटे बाबा! आपने पूरे शहर की सैर कर ली! मगर इस म्यूज़ीयम को देखे बग़ैर कैनाडा वापस मत जाईए। शाम हो गई है? अजी मैडम! शाम तो रोज़ ही हुआ करती है। रोज़ मशरिक़ बड़ी भाग दौड़ कर के सूरज को दुनिया की तरफ़ घसीट कर लाता है। और रोज़ मग़रिब
एक दिन क्या हुआ...
यह एक ऐसी शादीशुदा लड़की की कहानी है जो अपने शौहर से इसलिए परेशान है कि वह शारदा नाम की लड़की से मिलता रहता है। शारदा के बर्थडे वाले दिन वह उसे बताता है कि वह किसी काम से बंबई जा रहा है। इससे वह बहुत खुश होती है। मगर शाम को ख़बर आती है कि बंबई जाने वाला प्लेन क्रैश हो गया है। इस ख़बर से ज़रारा भी उदास नहीं होती। मगर तभी बाहर शोर होता है और उसका शौहर उसे आकर बाँहों में यह कहते हुए उठा लेता है कि वह बंबई नहीं शारदा की बर्थडे पार्टी में गया था।
स्टिल लाईफ़
एक ऐसे शख़्स की कहानी है जो अपने घर में तन्हा बैठा हुआ खु़द को टूटता बिखरता महसूस करता है। उसकी बीवी बच्चे सैर के लिए चिड़ियाघर गए हुए हैं। वह लॉन में अकेला बैठा अख़बार पढ़ रहा है। अख़बार पढ़ते हुए उसे तरह-तरह के ख़्याल आते रहते हैं और वह महसूस करता है कि वह टुकड़ों में बिखरा हुआ है, बिल्कुल स्टिल लाइफ़ की तरह।
जॉय
तरक्क़ी ने इंसान को मज़बूत तो बना दिया है, लेकिन इंसानी रिश्तों को कमज़ोर कर दिया है। यह एक ऐसे ही परिवार की कहानी है, जो एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद एक-दूसरे से अनजान हैं। हर कोई अकेला है। अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए घर के मुखिया ने एक कुत्ता पाल रखा है, जिसका नाम जॉय है। जॉय के साथ वह इतना ज़्यादा वक़्त बिताता है कि एक वक़्त उसे ऐसा लगता है कि जैसे उसकी रुह जॉय के अंदर समा गई है और जॉय की रुह उसके अंदर।
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