महमूद ख़ावर
ग़ज़ल 2
अशआर 1
यूँ तो तन्हाई का एहसास अज़ल से है हमें
कुछ दिनों से तो दिल-ए-ज़ार बहुत तन्हा है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere