नज़्र फ़ातमी
ग़ज़ल 24
अशआर 1
'नज़्र' फिर आया है इक रस्म निभाने का दिन
सज सँवर के सभी रावन को जलाने निकले
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere