शहाब अशरफ़
ग़ज़ल 15
अशआर 2
उतनी ही निगाहों की मिरी प्यास बढ़ी है
जितनी कि तुझे देख के तस्कीन हुई है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere