सिद्दीक़ फतहपुरी के शेर
कहने के लिए हम भी ज़बाँ रखते हैं लेकिन
ये ज़र्फ़ हमारा है कि हम कुछ नहीं कहते
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere