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वाजिदा तबस्सुम

1935 - 2011 | मुंबई, भारत

नारीवादी चेतना की प्रतिनिधि कथाकार, अपने बेबाक अंदाज़ और हैदराबादी समाज के सजीव चित्रण के लिए प्रसिद्ध

नारीवादी चेतना की प्रतिनिधि कथाकार, अपने बेबाक अंदाज़ और हैदराबादी समाज के सजीव चित्रण के लिए प्रसिद्ध

वाजिदा तबस्सुम के उद्धरण

मोहब्बत करने वाले निडर हो जाते हैं, ख़ौफ़ का कोई जज़्बा उन्हें बांध नहीं सकता।

औरत जब तक पर्दे में रहती है उसे क़दम-क़दम पर मर्द के सहारे की ज़रूरत महसूस होती है लेकिन जब वह पर्दे से बाहर आती है तो मर्द इसके लिए बे-मसरफ़ चीज़ बन कर रह जाता है।

(अफ़साना: नथ उतराई)

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