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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना

मिर्ज़ा ग़ालिब

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना

मिर्ज़ा ग़ालिब

MORE BYमिर्ज़ा ग़ालिब

    इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना

    दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

    तुझ से क़िस्मत में मिरी सूरत-ए-क़ुफ़्ल-ए-अबजद

    था लिखा बात के बनते ही जुदा हो जाना

    दिल हुआ कशमकश-ए-चारा-ए-ज़हमत में तमाम

    मिट गया घिसने में इस उक़दे का वा हो जाना

    अब जफ़ा से भी हैं महरूम हम अल्लाह अल्लाह

    इस क़दर दुश्मन-ए-अरबाब-ए-वफ़ा हो जाना

    ज़ोफ़ से गिर्या मुबद्दल ब-दम-ए-सर्द हुआ

    बावर आया हमें पानी का हवा हो जाना

    दिल से मिटना तिरी अंगुश्त-ए-हिनाई का ख़याल

    हो गया गोश्त से नाख़ुन का जुदा हो जाना

    है मुझे अब्र-ए-बहारी का बरस कर खुलना

    रोते रोते ग़म-ए-फ़ुर्क़त में फ़ना हो जाना

    गर नहीं निकहत-ए-गुल को तिरे कूचे की हवस

    क्यूँ है गर्द-ए-रह-ए-जौलान-ए-सबा हो जाना

    बख़्शे है जल्वा-ए-गुल ज़ौक़-ए-तमाशा 'ग़ालिब'

    चश्म को चाहिए हर रंग में वा हो जाना

    ता कि तुझ पर खुले एजाज़-ए-हवा-ए-सैक़ल

    देख बरसात में सब्ज़ आइने का हो जाना

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    शुमोना राय बिस्वास

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    मेहरान अमरोही

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    शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

    शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी,

    नोमान शौक़

    नोमान शौक़,

    जावेद नसीम

    जावेद नसीम,

    शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

    इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

    नोमान शौक़

    इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना नोमान शौक़

    जावेद नसीम

    इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना जावेद नसीम

    स्रोत :
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    Diwan-e-Ghalib

    Publication: Rekhta Publications
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