शेर

विषयानुसार हज़ारों लोकप्रिय शेर


  • ये उड़ी उड़ी सी रंगत ये खुले खुले से गेसू
    तिरी सुब्ह कह रही है तिरी रात का फ़साना

    एहसान दानिश

  • मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं
    मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना

    आसिम वास्ती

  • सुना है अब भी मिरे हाथ की लकीरों में
    नजूमियों को मुक़द्दर दिखाई देता है

    अमीर क़ज़लबाश

  • क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
    रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन

    मिर्ज़ा ग़ालिब

  • बड़े गुस्ताख़ हैं झुक कर तिरा मुँह चूम लेते हैं
    बहुत सा तू ने ज़ालिम गेसुओं को सर चढ़ाया है

    अज्ञात

  • ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम
    विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं

    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब
    ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया

    शहज़ाद अहमद

  • यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम
    जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें

    अल्लामा इक़बाल

  • तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
    मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

    अल्लामा इक़बाल

  • दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
    मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ

    मिर्ज़ा ग़ालिब

  • तअल्लुक़ आशिक़ ओ माशूक़ का तो लुत्फ़ रखता था
    मज़े अब वो कहाँ बाक़ी रहे बीवी मियाँ हो कर

    अकबर इलाहाबादी

  • रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को
    मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी

    जलील मानिकपूरी

  • मक़्बूल हों न हों ये मुक़द्दर की बात है
    सज्दे किसी के दर पे किए जा रहा हूँ मैं

    जोश मलसियानी

  • सबब हर एक मुझ से पूछता है मेरे रोने का
    इलाही सारी दुनिया को मैं क्यूँकर राज़-दाँ कर लूँ

    अज्ञात

  • गो हाथ को जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है
    रहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मिरे आगे

    मिर्ज़ा ग़ालिब

चित्रित शायरी

शायरी की सैकड़ों खूबसूरत तस्वीरें शेयर कीजिए

सम्पूर्ण

टैग