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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

लेखक : ज़हीर देहलवी

प्रकाशक : अरीब पब्लिकेशन्स, दिल्ली

मूल : नई दिल्ली, भारत

प्रकाशन वर्ष : 2006

भाषा : उर्दू

श्रेणियाँ : स्वतंत्रता आंदोलन

पृष्ठ : 227

सहयोगी : ग़ालिब इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली

atthara sau sattawan ke chashmdeed halaat
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लेखक: परिचय

ज़हीर देहलवी, सय्यद ज़हीरुद्दीन हुसैन (1825-1911) ‘ज़ौक़’ और ‘ग़ालिब’ के बा’द की पीढ़ी के बहुत नुमायाँ शाइ’र और ‘दाग़’ के समकालीन। ‘ज़ौक़’ के शार्गिद थे। कम-उम्री ही में, लाल क़िले में अच्छी नौकरी पा गए लेकिन अच्छे दिनों का ये सिलसिला 1857 के बा’द ख़त्म हो गया। दिल्ली छोड़ कर बरेली और रामपुर में रहे। फिर कुछ दिन दिल्ली रह कर अलवर, जयपुर और टोंक में कई साल गुज़ारे। अख़िरी उम्र हैदराबाद में गुज़री और वही पैवंद-ए-ख़ाक हुए।

 

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