aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
पहचान: फ़िक्शन लेखक, ड्रामा लेखक और बाल साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार
वकील नजीब (मूल नाम: अब्दुल वकील) का जन्म 1 जुलाई 1946 को नागपुर में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा बैतुल उलूम उर्दू प्राइमरी स्कूल तथा बाद में हिसामिया उर्दू मिडिल स्कूल में प्राप्त की। 1964 में अंजुमन हायर सेकेंडरी स्कूल, नागपुर से मैट्रिक पास किया और एस.एफ.एस. कॉलेज में बी.एससी. में प्रवेश लिया, लेकिन पिता के निधन के कारण शिक्षा का सिलसिला कुछ समय के लिए रुक गया। इसी दौरान 1965 में इस्लामिया स्कूल, मोमिनपुरा नागपुर में शिक्षक नियुक्त हुए। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और बी.ए., बी.एड. तथा उर्दू में एम.ए. की डिग्रियाँ प्राप्त कीं।
वकील नजीब उर्दू साहित्य के प्रसिद्ध और अनुभवी साहित्यकार हैं। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, यात्रा-वृत्तांत और बाल साहित्य सहित उर्दू साहित्य की अनेक विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है, हालांकि उपन्यासकार के रूप में उन्हें विशेष प्रसिद्धि मिली। अब तक उनके उन्नीस उपन्यास, छह कहानी-संग्रह, दो नाटक-संग्रह, तीन यात्रा-वृत्तांत और बच्चों की कविताओं का एक संग्रह प्रकाशित हो चुका है। उनकी सभी रचनाएँ मौलिक हैं और उनकी निरंतर सृजनात्मक सक्रियता का प्रमाण हैं।
उनके प्रमुख उपन्यासों में मासूम बिजूका, कमीयूटान, मेहरबान जिन्न, इंसानियत और दरिंदगी, सियाह रात, नवाब बंडई वाला, साज़िश, जाँबाज़ शहज़ादे, पाँच भाई और ग़मगुसार शामिल हैं। कहानी-संग्रहों में वापसी, जंगल की अमानत, अपना दुख अपनी खुशी और शुमाली हिंदुस्तान की सैर विशेष उल्लेखनीय हैं। बच्चों के लिए लिखी गई उनकी कहानियाँ ख़ौफ़नाक हवेली, अनोखा इनाम, क़ातिल पापा और टिफ़िन बॉक्स भी काफी लोकप्रिय हुईं।
वकील नजीब बाल साहित्य के महत्वपूर्ण लेखक, समीक्षक और शोधकर्ता भी हैं। बच्चों की मनोवृत्ति, रुचियों और समस्याओं पर उनकी गहरी दृष्टि है। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण, सहज और प्रभावशाली है, जिसके कारण उनकी रचनाएँ बच्चों और बड़ों—दोनों में समान रूप से पसंद की जाती हैं।