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राजस्थान हमेशा से एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रदेश रहा है, जिसे पहले राजपूताना कहा जाता था और जो कई छोटी-बड़ी स्वतंत्र रियासतों में विभाजित था। इस प्रदेश में मेवाड़, मारवाड़ और जयपुर जैसी शक्तिशाली रियासतें थीं, वहीं टोंक नामक एक रियासत 19वीं सदी की शुरुआत (1817) में अस्तित्व में आई। इस रियासत की स्थापना नवाब अमीर ख़ान ने की थी और यह राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत थी।
स्वतंत्रता से पहले और बाद में भी, यह इलाक़ा शिक्षा और साहित्य का केंद्र बना रहा। हालाँकि अब यह एक स्वतंत्र रियासत नहीं है, लेकिन यहाँ आज भी स्वतंत्रता पूर्व के साहित्यिक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
भले ही आज यहाँ से कोई राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान या कवि उभरकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन पुराने साहित्यकारों की विरासत आज भी जीवंत है। उन्हीं में से एक प्रमुख नाम है मुराद सईदी, जिन्होंने न केवल रियासती युग की साहित्यिक परंपराओं को बनाए रखा, बल्कि आधुनिक साहित्य को भी नई ऊँचाइयाँ प्रदान करने का प्रयास किया।
जन्म और शिक्षा:
मुराद सईदी, जिनका असली नाम हाफ़िज़ इमादुद्दीन ख़ान था, 21 जुलाई 1923 को टोंक में पैदा हुए। उनके पिता मुफ़्ती सिराजुद्दीन ख़ान थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई और बाद में उन्होंने जामिया उर्दू, अलीगढ़ से अदीब और अदीब माहिर की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं।
शिक्षा पूर्ण करने के बाद, उन्होंने सरकारी नौकरी की तलाश की और आबकारी विभाग में कार्यरत हो गए, जहाँ से वे सेवानिवृत्त हुए। 24 मई 1989 को उनका निधन हो गया।
उनके पिता मुफ़्ती सिराजुद्दीन ख़ान मूल रूप से स्वात (अब पाकिस्तान में) के निवासी थे और नवाब इब्राहिम अली ख़ान के शासनकाल में टोंक आए थे। उनकी विद्वता और योग्यता को देखते हुए, नवाब ने उन्हें काव्य दरबार का प्रशासक नियुक्त किया था, जिससे यह परिवार टोंक में अत्यंत सम्मानित हो गया।
साहित्यिक यात्रा:
मुराद सईदी को युवावस्था से ही काव्य में रुचि थी। उनकी यह रुचि उन्हें सौलत टोंकी और बिस्मिल सईदी जैसे महान कवियों की संगति में ले आई। पहले उन्होंने सौलत टोंकी से मार्गदर्शन प्राप्त किया, फिर बिस्मिल सईदी (1901-1976) के शिष्य बने और उन्हीं के नाम से "सईदी" उपनाम अपनाया।
लगभग तीस वर्षों तक वे बिस्मिल सईदी के शिष्य रहे, जो किसी भी साहित्यकार को परिपक्वता की ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त समय होता है। इस दौरान, भारत की स्वतंत्रता और विभाजन जैसी घटनाओं ने समाज को गहरे रूप से प्रभावित किया। कुछ समय तक साहित्य में ठहराव सा आ गया, लेकिन धीरे-धीरे माहौल बदला और काव्य सभाएँ पुनः शुरू हुईं, जिससे उर्दू कविता के एक नए युग की शुरुआत हुई।
साहित्यिक योगदान:
मुराद सईदी के साहित्यिक कार्यों की सूची इस प्रकार है:
गुलदस्ता-ए-मुराद (काव्य संग्रह) – संकलक: शौक़ अहसनी (2017)
अज़ीज़ों के दरमियान (काव्य संग्रह) – संकलक: सहेल पयामी (2022)
ग़ैरत-ए-गुलज़ार (चौहर बैत का संग्रह) – संकलक: डॉ. सआदत रईस (2024)
मुराद सईदी: व्यक्ति और कवि (निबंध संग्रह) – संकलक: सैयद साजिद अली टोंकी (2024)