aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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आसिफ़, मीर महबूब अ’ली ख़ाँ, निज़ाम हैदराबाद (1866-1911) रियासत हैदराबाद के हुक्मराँ थे जिन्होंने देहली और लखनऊ के उजड़ने के बा’द उर्दू के शाइ’रों की सरपरस्ती की। शे’र भी कहते थे। ‘दाग़’ देहलवी उनके उस्ताद थे। ‘दाग़’ के बा’द ‘जलील’ मानिकपुरी की शागिर्दी में आ गए।
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