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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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रुख़ अपना आइना मुझ को बना के देख लिया

आनंद नारायण मुल्ला

रुख़ अपना आइना मुझ को बना के देख लिया

आनंद नारायण मुल्ला

रोचक तथ्य

दिसंबर 1940

रुख़ अपना आइना मुझ को बना के देख लिया

मिरी निगाह के पर्दे में के देख लिया

जो दोस्त थे उन्हें दुश्मन बना के देख लिया

ज़बाँ पे दिल की तमन्ना को ला के देख लिया

हक़ीक़त-ए-ग़म-ए-हस्ती के नक़्श मिट सके

तिलिस्म-ख़ाना-ए-अरमाँ बना के देख लिया

वो बे-ख़बर मिरे सोज़-ए-जिगर से फिर भी नहीं

हर इक निगाह पे पर्दा गिरा के देख लिया

उन्हें क़ुबूल नहीं इश्क़-ए-राएगाँ अपना

क़दम क़दम पे निगाहें बिछा के देख लिया

अब और इस से सिवा चाहते हो क्या 'मुल्ला'

ये कम है उस ने तुम्हें मुस्कुरा के देख लिया

स्रोत :
  • पुस्तक : Kulliyat-e-Anand Narayan Mulla (पृष्ठ 184)
  • रचनाकार : Khaliq Anjum
  • प्रकाशन : National Council for Promotion of Urdu Language-NCPUL (2010)
  • संस्करण : 2010

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