उम्र गुज़री है इल्तिजा करते

अनवर साबरी

उम्र गुज़री है इल्तिजा करते

अनवर साबरी

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    उम्र गुज़री है इल्तिजा करते

    क़िस्सा-ए-ग़म लब-आश्ना करते

    जीने वाले तिरे बग़ैर दोस्त

    मर जाते तो और क्या करते

    हाए वो क़हर-ए-सादगी-आमेज़

    काश हम फिर उन्हें ख़फ़ा करते

    रंग होता कुछ और दुनिया का

    शैख़ मेरा अगर कहा करते

    आप करते जो एहतिराम-ए-बुताँ

    बुत-कदे ख़ुद ख़ुदा ख़ुदा करते

    रिंद होते जो बा-शुऊर 'अनवर'

    क्या बताऊँ तुम्हें वो क्या करते

    RECITATIONS

    नोमान शौक़

    नोमान शौक़

    नोमान शौक़

    उम्र गुज़री है इल्तिजा करते नोमान शौक़

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