पंद्रह अगस्त

जमील फ़ातमी

पंद्रह अगस्त

जमील फ़ातमी

MORE BYजमील फ़ातमी

    फ़र्द फ़र्द मस्त है

    पंद्रह अगस्त है

    जोश है उबाल है

    रंग है गुलाल है

    गली गली हैं रौनक़ें

    अजीब सी हैं रौनक़ें

    हम कभी ग़ुलाम थे

    भारती ग़ुलाम थे

    ज़िंदगी की शाम थी

    साँस तक ग़ुलाम थी

    फ़िरंगियों के जौर से

    भारती निढाल थे

    ज़ुल्म जब बहुत हुआ

    अपनी हद से बढ़ गया

    भारती बिफर गए

    हम सभी बिफर गए

    जान-ओ-माल तज दिया

    घर अयाल तज दिया

    एक हो गए जो हम

    दूर हो गया अलम

    हुर्रियत मिली हमें

    आफ़ियत मिली हमें

    फ़र्द फ़र्द मस्त है

    पंद्रह अगस्त है

    स्रोत :
    • पुस्तक : بچوں کا ماہنامہ امنگ (पृष्ठ 42)
    • रचनाकार : جمیل فاطمی
    • प्रकाशन : اردو اکادمی دہلی (اگست 2019)

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