नज़्में

नज़्म, उर्दू में एक विधा के रूप में, उन्नीसवीं सदी के आख़िरी दशकों के दौरान पैदा हुई और धीरे धीरे पूरी तरह स्थापित हो गई। नज़्म बहर और क़ाफ़िए में भी होती है और इसके बिना भी। अब नसरी नज़्म (गद्द-कविता) भी उर्दू में स्थापित हो गई है।

1846 -1921

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

1925

पूर्वाधुनिक शायर, नज़्म और ग़ज़ल दोनों विधाओं में शायरी की; बच्चों के लिए भी बेहतरीन नज़्में लिखीं

1969

लोकप्रिय पाकिस्तानी शायरों में शामिल. अपारंपरिक विषयों की नज़्मों के लिए जाने जाते हैं

प्रगतिवादी साहित्यिक विचारधारा से सम्बद्ध शायर, रोज़मर्रा के मसाइल और विषयों को अपनी नज़्मों में प्रयोग के लिए जाने जाते हैं

1940 -1998

शायर और गद्यकार, अपने क़तआत और लम्बी नज़्मों के लिए विख्यात

1942

आधुनिकता से प्रभावित अहम शायर और कहानीकार, साहित्यिक जीवन का आरम्भ कहानी लेखन से किया, बाद में नज़्में भी कहीं

1905 -1948

सबसे लोकप्रिय उर्दू शायरों में से एक। गहरी रूमानी शायरी के लिए प्रसिद्ध

1915 -1995

आधुनिक उर्दू नज़्म के संस्थापकों में शामिल। अग्रणी फ़िल्म-संवाद लेखक। फ़िल्म ' वक़्त ' और ' क़ानून ' के संवादों के लिए मशहूर। फ़िल्म 'वक़्त' में उनका संवाद ' जिनके घर शीशे के हों वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते ' , आज भी ज़बानों पर

1974

शोधकर्ता और शायर, अपनी नज़्म "सोचने पे पहरा है" के लिए मशहूर/ प्रोफ़ेसर जेएनयू

1931 -1990

पाकिस्तानी शायर और लेखक, ‘लब ओ रुख़सार’ नाम से मुहब्बत की नज़्मों का संग्रह प्रकाशित हुआ ‘शायरी की ज़बान’ उनके आलोचनात्मक लेखों का संग्रह है

1950

पाकिस्तान के शायर और पत्रकार

1958 -2011

महत्वपूर्ण और लोकप्रिय पाकिस्तानी शायर/उस्ताद शायर बहज़ाद लखनवी के पोते

1920 -2001

पाकिस्तानी शायरा, इक़बाल के फ़ारसी कलाम का पद्यात्मक अनुवाद भी किया

1963

महत्वपूर्ण पाकिस्तानी शायर, अपने संजीदा लहजे के लिए विख्यात।

1887 -1927

नज़्म के प्रमुख शायर, पिंगल में अपने तजरबे के लिए मशहूर,ग़ज़ल के कट्टर विरोधी

1950

प्रमुख पाकिस्तानी शायरात में शामिल, अपनी नज्मों के लिए प्रख्यात

1952

प्रसिद्ध कवयित्री, कहानीकार और अनुवादक. समकालीन सऊदी साहित्य के अनुवाद के लिए जानी जाती हैं

प्रतिरोध और आधुनिक सामाजिक समस्याओं को अपनी शायरी में शामिल करनेवाली शायरा।

1980

पाकिस्तान की नई पीढ़ी के मशहूर शायर, ‘मैं किसी दास्तान से उभरूँगा’ इनके काव्य संग्रह का नाम है

1931 -1992

प्रमुखतम प्रगतीशील शायरों में शामिल / अपनी भावनात्मक तीक्षणता के लिए विख्यात

1882 -1935

लखनऊ में क्लासिकी ग़ज़ल के प्रमुख उस्ताद शायर

1922 -1991

नई उर्दू शायरी के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर, उनकी कई ग़ज़लें गायी गई हैं।

1882 -1949

बिहार के अहम शायर और गद्यकार, आलोचनात्मक आलेख भी लिखे और हास्य लेखन भी

1924 -2018

आज़ादी के बाद भारतीय राजनीति का लोकप्रिय व्यक्तित्व, एक उत्कृष्ट समाज की रचना के विचारों वाली शायरी की; ‘जंग न होने देंगे’ उनके काव्य संग्रह का नाम है