aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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रह-ए-तलब में किसी को किसी का ध्यान नहींहुजूम-ए-हम-सफ़राँ है क़रीब आ जाओ
सुना है एक ऐसा ताइफ़ा है अहल-ए-फ़न मेंजो दीवाना नहीं दीवाना-पन पहने हुए है
एक एक कर के ख़ुद से बिछड़ने लगे हैं हमदेखो तो जा के क़ाफ़िला-सालार कौन है
बैंड-बाजा है थोड़ी देर का बसरात भर किस ने रक़्स करना है
दिल पहुँचा हलाकी को निपट खींच कसालाले यार मिरे सल्लमहू अल्लाह-तआला
कहता है 'तल्ख़' घर से निकलना करूँगा बंदकोई बचा है जिस से कि उलझा नहीं हूँ मैं
कोई बैंड-बाजा सा कानों में थाअजब शोर ऊँचे मकानों में था
'इश्क़ इक कारवान-ए-आगाहीहुस्न इक बे-ख़बर लुटेरा है
मिला करते हैं सब से हम झुक के दाइमकमाँ की तरह ख़ुद में ख़म देखते हैं
इस ताइफ़े में एक कमी है तो आप कीऐ दुश्मनान-ए-इल्म-ओ-हुनर रक़्स कीजिए
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