aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "bulbul"
'बू-अली' है नब्ज़-दानी में बुताँ की 'आबरू'उस का इस फ़न में जो नुस्ख़ा है सो है इक कीमिया
बुल-हवस बुल्बुलाँ नमन हर बनदेख अपस दुख की इल्तिमास न कर
हो सदाक़त का अलम क्यूँकर बुलंददार है लेकिन बिना मंसूर है
बुत-परस्तों कूँ है ईमान-ए-हक़ीक़ी वस्ल-ए-बुतबर्ग-ए-गुल है बुलबुलों कूँ जिल्द-ए-क़ुरआन-मजीद
छू तो लूँगा बुलंदियों को मगरदिल में पुर-जोश वलवला तो हो
एक बुत से निबाह करता हूँदिल की दुनिया तबाह करता हूँ
बुलबुल है चमन में एक हमदर्दमैं भी किसी गुल का मुब्तला हूँ
गुर बुत-ए-कम-सिन दाम बिछाएबुलबुलें क्या हैं हाथी फँसाए
गुलों के इश्क़ में दे जान बुलबुलअरे ये हौसले एक मुश्त पर के
बुल-हवस बंद-ए-उक़्दा-ए-ग़म हैज़ुल्फ़-ए-मुश्कीं सीं पेच-ओ-ताब निकाल
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