aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "kufr"
ऐ शैख़ अगर कुफ़्र से इस्लाम जुदा हैपस चाहिए तस्बीह में ज़ुन्नार न होता
नए मंसूर हैं सदियों पुराने शेख़-ओ-क़ाज़ी हैंन फ़तवे कुफ़्र के बदले न उज़्र-ए-दार ही बदला
है वो बे-वहदत कि जो समझे है कुफ़्र ओ दीं में फ़र्क़रखती है तस्बीह रिश्ता तार से ज़ुन्नार के
न पूछो मुफ़्तियान-ए-शरअ' का अहवाल जाने दोतनफ़्फ़ुर कुफ़्र को जिस से हो वो इस्लाम क्या होगा
नहीं है इम्तियाज़-ए-नेक-ओ-बद चश्म-ए-हक़ीक़त मेंमुझे यकसाँ हुआ है कुफ़्र और इस्लाम ऐ वाइ'ज़
ऐ शैख़ न ये कुफ़्र न फ़ित्ना है न शर हैइक हम भी सुनाने को नई बात उठे हैं
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