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ग़ज़ल
ग़रीब-ख़ाने की ये उदासी ये ना-दुरुस्ती नहीं क़दीमी
चहल पहल भी कभी यहाँ थी कभी ये घर भी सँवर चुका है
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
मैं और मेरी तन्हाई
चहल-कदमी करते हुए वो दो साए क्या हुए
ये लहरें जिन के पाँव चुरा लाई हैं
अंजुम सलीमी
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नज़्म
होली
अय्यारगी से पहले अपने तईं छुपा कर
चाहा कि मैं भी निकलूँ उन में से छुट-छुटा कर
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
जल्वा-ए-सहर
सड़क जो आती है छावनी से चहल-पहल उस पे ख़ूब ही है
निकल के गुंजान बस्तियों से बरा-ए-तफ़रीह सब हैं आए
नुशूर वाहिदी
नज़्म
दूसरी रात
तुम्हारे जाने के बाद
तुम्हारी चहल-क़दमियाँ घूमती रहती हैं दिल के आँगन में
वर्षा गोरछिया
नज़्म
उरूस-उल-बिलाद
चहल-पहल में भिड़ों जैसी भनभनाहट में
किसी को पकड़ो सर-ए-राह मार दो चाहे
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
ज़ैतून का दरख़्त
मोहब्बत के बाग़ में रोज़ चहल-क़दमी कर सकें
एक दरख़्त तुम्हारे नाम का भी होगा
ज़ीशान साहिल
ग़ज़ल
वो जुनूँ के अहद की चाँदनी ये गहन गहन की उदासियाँ
वो क़फ़स क़फ़स की चहल-पहल ये चमन चमन की उदासियाँ
शमीम करहानी
नज़्म
प्रेमचंद को ख़िराज-ए-अक़ीदत
वो प्रेमचंद-मुंशी-ए-बे-मिस्ल-ओ-बे-बदल
थी जिस के दम से बज़्म-ए-अदब में चहल-पहल



