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नज़्म
ईद मनाऊँ कैसे
चाँद तो देख लिया मैं ने बहुत साफ़ सा था
अपने चंदा को दिखाऊँ तो दिखाऊँ कैसे
सलाहुद्दीन अय्यूब
ग़ज़ल
मैं क्या बताऊँ तुझे याद क्या दिलाऊँ तुझे
तू जानता है जो तू ने किया है मेरे साथ
अब्दुर्रहमान मोमिन
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ग़ज़ल
मैं क्यूँ ज़बाँ से वफ़ा का यक़ीं दिलाऊँ तुम्हें
तुम आज़माओ मुझे और मैं आज़माऊँ तुम्हें
क़ाज़ी एहतिशाम बछरौनी
नज़्म
वालिद की याद में
जो लोग क़ब्र में उस को उतार आए हैं
हैं सोगवार दिलाऊँ उन्हें यक़ीं क्यूँकर




