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नज़्म
आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी
आज के ब'अद मगर रंग-ए-वफ़ा क्या होगा
इश्क़ हैराँ है सर-ए-शहर-ए-सबा क्या होगा
परवीन शाकिर
नअत
चमन की सूखती शाख़ों ने जब उन को पुकारा है
बहारों के पयम्बर को सर-ए-दोष-ए-सबा देखा

