aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "bajat"
कैसा अजीब आया है इस साल का बजटमुर्ग़ी का जो बजट है वही दाल का बजट
बजट मैं ने देखे हैं सारे तिरेअनोखे अनोखे ख़सारे तिरे
बजट की कई सख़्तियाँ और भी हैं''अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं''
बिकती है अब किताब भी कैसेट के रेट पेकैसे बनेगा 'ग़ालिब' ओ 'इक़बाल' का बजट
बुआ को तो देखो न गहना न पाताबजट हाथ में जैसे धोबिन का खाता
बिछड़े थे जब ये लोग महीना था जून कासोहनी बना रही थी महींवाल का बजट
टीवी का ये मज़ाक़ अदीबों के साथ हैशाएर से दुगना रख दिया क़व्वाल का बजट
इस क़दर सर्फ़ इलाही मिरे ख़ून-ए-दिल काअब मोहब्बत का बजट फ़ेल हुआ जाता है
है बजट घाटे में जुर्माने ज़रूरी हैं यहाँइस लिए सरकार मेरी लूट कर खाने को है
न जी भर के देखा न कुछ बात कीबड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँबाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ
कोई समझे तो एक बात कहूँइश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं
तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी होतुम को देखें कि तुम से बात करें
हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन कोक्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया
गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भीवो बात अपनी जगह है ये बात अपनी जगह
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगेतुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सहीतुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
इक रात वो गया था जहाँ बात रोक केअब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के
वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न थावो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है
कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आयाबात निकली तो हर इक बात पे रोना आया
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