आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "aashiq-e-dil-giir"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "aashiq-e-dil-giir"
ग़ज़ल
छेड़ मंज़ूर है क्या आशिक़-ए-दिल-गीर के साथ
ख़त भी आया कभी तो ग़ैर की तहरीर के साथ
निज़ाम रामपुरी
ग़ज़ल
समझो दस्तावेज़ ज़ख़्म-ए-आशिक़-ए-दिल-गीर को
कब मिटा सकते हो अपने हाथ की तहरीर को
मुंशी बनवारी लाल शोला
ग़ज़ल
इस क़दर खिंचना नहीं अच्छा बुत-ए-बे-पीर देख
प्यार की नज़रों से सू-ए-आशिक़-ए-दिल-गीर देख
शेर सिंह नाज़ देहलवी
ग़ज़ल
खींच ले अव्वल ही से दिल की इनान-ए-इख़्तियार
तू ने गर ऐ आशिक़-ए-दिल-गीर फिर खींची तो क्या
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
अपने बिस्मिल से ये कहता था दम-ए-नज़अ वो शोख़
था जो कुछ अहद सो ओ आशिक़-ए-दिल-गीर न तोड़
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
क़त्ल के बा'द अब उन को भी है सदमा 'नुदरत'
लाशा-ए-आशिक़-ए-दिल-गीर लिए बैठे हैं