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ग़ज़ल
जो इन की नज़र से खेले दुख पाए मुसीबत झेले
फिरते हैं ये सब अलबेले दिल ले के मुकर जाने को
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
राहज़नों से घबरा कर सब साथी संगत छोड़ गए
और पुर-ख़ौफ़ डगर पर गर्म-ए-सफ़र हम आज अकेले हैं
अफ़ज़ल परवेज़
ग़ज़ल
नई जवानी नए-नवीले नादान अल्लढ़ और अलबेले
सच पूछो तो तुम को साहिब दिल देते जी डरता है
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
ग़ज़ल
इन के दम से रौनक़-ए-हस्ती इन के दम से ये दुनिया
ख़ाक-बसर हैं ज़ाहिर में जो लोग बड़े अलबेले हैं
पंडित विद्या रतन आसी
ग़ज़ल
उन के दम से रौनक़-ए-हस्ती उन के दम से ये दुनिया
ख़ाक-बसर हैं ज़ाहिर में जो लोग बड़े अलबेले हैं
पंडित विद्या रतन आसी
ग़ज़ल
ये मुटियारें छैल-छबेली ये गबरू बाँके अलबेले
जाती है किस रूप नगर को ये टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी
शुरेश चंद्र शौक
ग़ज़ल
जैसे किसी अल्हड़ गोरी का हो रंगीन ख़याल 'मुजीब'
है ऐसी शर्माई लजाई अलबेले सावन की धूप