aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "asar-e-ishq"
मैं सोचता हूँ भला मेरे जस्द-ए-ख़ाकी सेऐ 'अश्क' क्या मिरे तार-ए-नफ़स का रिश्ता था
ऐ इश्क़ क्या यही है मकाफ़ात-ए-आरज़ूअपनी ही ख़ाक हाथ से अपने उड़ाऊँ मैं
फूल वो है जो मयस्सर चढ़े ये सुनता थाअब खुला दिल की रह-ए-इश्क़ में क़ुर्बानी दे
भटक न जाए कहीं अस्प-ए-इश्क़ राहों सेदुआ लबों पे तिरे हम-रिकाब मेरी है
बजा कि हिस्सा-ए-हक़ भी न मिल सका लेकिन'असर' उदास न हो अपना दिल कुशादा कर
ग़म-ए-ज़माना से फ़ुर्सत कहाँ 'असर-साहब'दुआ को हाथ जो अपने लिए उठाऊँ मैं
ऐब-जूई में शब-ओ-रोज़ गुज़ारें जो 'असर'अपने किरदार पे कब उन की नज़र होती है
पत्थर समझ रहे थे असर जिस को लोग वोतरशा गया तो रौनक़-ए-बाज़ार हो गया
डुबोएगा हमें सैल-ए-सितम 'असर' कैसेज़माने भर की दु'आ तो हमारे साथ में है
सर में सौदा-ए-बंदगी है 'असर'कौन इस आस्ताँ से उठता है
'असर' मुझ को ज़माना याद रक्खेगा क़यामत तक'अता की 'उम्र-ए-फ़ानी को हयात-ए-जावेदाँ मैं ने
आँखों में अश्क दिल में ख़लिश सोज़ आह मेंहै इक जहान-ए-दर्द मोहब्बत की राह मैं
हर-चंद अश्क-ए-यास जब उमडे तो पी गएचमका फ़लक पे एक सितारा कभी कभी
मुझ को बरबाद ही रहने दे तलाफ़ी से गुज़रइश्क़ एहसाँ है गिराँ-बारी-ए-एहसाँ की क़सम
'असर' अर्ज़-ए-हाल उन से बे-सोचे-समझेकहा था कि पहले नज़र देख लेना
अब हाथ मलते हैं कि दम-ए-अर्ज़-ए-माजराकहने की बात ध्यान से कैसी उतर गई
'असर' है और लज़्ज़त बे-ख़ुदी कीवो जान-ए-इंतिज़ार आए न आए
ख़ूँ हुआ अश्क बना और मिज़ा से टपकादिल कि लज़्ज़त-कश-ए-रंगीनी-इंकार न था
इश्क़ की गर्मी-ए-बाज़ार कहाँ से लाऊँयूसुफ़-ए-दिल का ख़रीदार कहाँ से लाऊँ
झाड़ कर दामन 'असर' जिस बज़्म से उठ आए थेआज फिर देखे गए हज़रत उधर जाते हुए
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